
प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के कुंडा विधायक और जनसत्ता पार्टी लोकतांत्रिक प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के विवाद में नया मोड़ आ गया है। घरेलू हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन पर लगी रोक संबंधी याचिका पर चार महीने के भीतर निर्णय सुनाए।
भानवी सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाया और इस दिशा में उन्हें मजबूर किया गया। उन्होंने बताया कि उन्हें लंबे समय से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। फिलहाल दोनों अलग रह रहे हैं और तलाक की प्रक्रिया चल रही है।
भानवी सिंह ने लगाए गंभीर आरोप
भानवी ने कहा कि शादी के दौरान उन्हें ‘पर्दा’ प्रथा मानने के लिए मजबूर किया गया। तीन बेटियों के जन्म के बाद भी उन्हें बताया गया कि यदि बेटे नहीं होंगे तो पति को दूसरी शादी करनी पड़ेगी। इसके बावजूद उन्होंने परिवार की परंपरा निभाने के लिए दो बेटों को जन्म दिया, पर सम्मान नहीं मिला।
भानवी ने आरोप लगाया कि घर में दूसरी महिलाओं के आने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और मेडिकल सहायता तक नहीं दी गई। उनके मुताबिक प्रॉपर्टी उनके नौकरों, ड्राइवर और अन्य व्यक्तियों के नाम ट्रांसफर कराने के लिए जाली दस्तखत कराए गए, जबकि उनके खिलाफ तलाक का केस भी दायर किया गया।
उन्होंने आगे कहा, “मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए, दिल्ली, लखनऊ, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में पुलिस ने झूठी चार्जशीट और एफआईआर दर्ज की। इसके बावजूद मैं टूटी नहीं हूं। सुप्रीम कोर्ट ने मेरे पक्ष में फैसला दिया है, मुझे न्याय की उम्मीद है।”
भानवी सिंह ने साफ किया कि उनका संघर्ष महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है और उनका भरोसा है कि न्याय अवश्य मिलेगा।