Tuesday, January 13

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तालिबान-ताजिकिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर, अफगानिस्तान से हमलों में चीनी नागरिकों की मौत, क्षेत्र में बढ़ सकती है अशांति
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तालिबान-ताजिकिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर, अफगानिस्तान से हमलों में चीनी नागरिकों की मौत, क्षेत्र में बढ़ सकती है अशांति

काबुल/दुशांबे: मध्य एशिया में ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ता ही जा रहा है। ताजिकिस्तान ने पिछले एक महीने में अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत से तीसरी बार सीमा पार हमला होने की जानकारी दी है, जिसमें कई सैनिकों की जान गई। इन हमलों में ताजिकिस्तान के शमसुद्दीन शोखिन जिले में कम से कम पांच लोग मारे गए, जिनमें तीन कथित आतंकवादी शामिल थे।   चीनी नागरिकों पर भी हमला हमलों में कई चीनी मजदूरों की भी मौत हुई, जो ताजिकिस्तान में खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे थे। ताजिकिस्तान में चीनी कंपनियों के अनेक बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसमें सड़क, सुरंग, बिजली परियोजनाएँ और सोने की खदानें शामिल हैं। इस कारण हमलों का मकसद क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाना और तालिबान सरकार की सुरक्षा क्षमता पर सवाल उठाना माना जा रहा है।   तालिबान और ताजिकिस्तान के बीच नाज़ुक रिश्ते...
बिस्किट से टीवी सीरियल तक: बलूच नेता ने पाकिस्तानी सेना के बिजनेस साम्राज्य की पोल खोली
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बिस्किट से टीवी सीरियल तक: बलूच नेता ने पाकिस्तानी सेना के बिजनेस साम्राज्य की पोल खोली

  इस्लामाबाद/नई दिल्ली: बलूचिस्तान के कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान की सेना पर बड़ा खुलासा किया है। उनके मुताबिक पाकिस्तानी सेना सिर्फ देश की रक्षा में नहीं, बल्कि व्यवसाय और आर्थिक ताकत बढ़ाने में ज्यादा रुचि रखती है। मीर ने बताया कि सेना बिस्किट, टीवी ड्रामा, बेकरियों, बैंकों, रियल एस्टेट और अनाज जैसी कई इंडस्ट्रीज में सक्रिय है, जबकि युद्ध के मैदान पर उसका रिकॉर्ड बेहद खराब है।   सेना बन चुकी सबसे बड़ी कारोबारी संस्था: मीर यार ने कहा कि पाकिस्तान की सेना देश का सबसे बड़ा व्यवसायी समूह है, जो अरबों रुपये का कारोबार कर रहा है, जबकि देश की अर्थव्यवस्था डूबती जा रही है और मदद की गुहार लगाती रही। गरीब और संकटग्रस्त देश में सेना मुनाफे पर केंद्रित है, न कि नागरिक सुरक्षा या युद्ध में सफलता पर।   युद्ध में कमजोर, न्यूक्लियर हथियारों में मुनाफा: बलूच नेता ने कहा कि ...
50 साल पुराने दस्तावेज खुलासा: अमेरिका हमेशा से रहा पाकिस्तान का पक्षधर, भारत को कमजोर करने की रणनीति में जुटा
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50 साल पुराने दस्तावेज खुलासा: अमेरिका हमेशा से रहा पाकिस्तान का पक्षधर, भारत को कमजोर करने की रणनीति में जुटा

  वॉशिंगटन/नई दिल्ली: जून 1972 में भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के संस्थापक आर.एन. काओ और तत्कालीन भारतीय सेना प्रमुख जनरल (बाद में फील्ड मार्शल) सैम मानेकशॉ के बीच हुई एक आधिकारिक बातचीत के दस्तावेजों से अमेरिका की दक्षिण एशिया में पाकिस्तान-पक्षधर नीति और भारत को कमजोर करने की रणनीति उजागर हुई है।   डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, अमेरिका हमेशा से पाकिस्तान को मजबूत देखना चाहता था ताकि भारत के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया जा सके। काओ ने अपने टॉप सीक्रेट नोट में मानेकशॉ को चेताया था कि अमेरिका और चीन दोनों कश्मीर विवाद पर पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं और इस तनाव को बनाए रखना उनके हित में है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत ने दक्षिण एशिया में अपनी सैन्य शक्ति का दावा किया, लेकिन अमेरिका इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था।   CIA की गुप्त गति...
सोमालीलैंड को मान्यता देने पर इजरायल घिरा, मुस्लिम देशों में आक्रोश, अफ्रीकी यूनियन की कड़ी चेतावनी
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सोमालीलैंड को मान्यता देने पर इजरायल घिरा, मुस्लिम देशों में आक्रोश, अफ्रीकी यूनियन की कड़ी चेतावनी

  सोमालिया से अलग हुए क्षेत्र सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के इजरायल के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की इस घोषणा के बाद मुस्लिम देशों में नाराजगी साफ दिख रही है, वहीं अफ्रीकी यूनियन (AU) और सोमालिया ने इसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है।   सोमालिया सरकार ने इजरायल के इस कदम को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है। सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में कहा कि यह फैसला जानबूझकर उठाया गया है और इससे हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सोमालीलैंड आज भी सोमालिया गणराज्य का अभिन्न हिस्सा है।   मुस्लिम देशों की तीखी प्रतिक्रिया   सोमालिया के करीबी सहयोगी तुर्की ने भी इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंद...
थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर तत्काल युद्धविराम, हफ्तों की खूनी झड़पों के बाद बनी सहमति
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थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर तत्काल युद्धविराम, हफ्तों की खूनी झड़पों के बाद बनी सहमति

  थाईलैंड और कंबोडिया ने कई हफ्तों से जारी खूनी सीमा संघर्ष के बाद आखिरकार तत्काल युद्धविराम पर सहमति जता दी है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की ओर से जारी संयुक्त बयान के अनुसार, यह युद्धविराम स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे से प्रभावी हो गया है। इसके तहत सीमा क्षेत्रों में सभी सैन्य गतिविधियों और सैनिकों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।   बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में अब तक कम से कम 41 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 10 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। युद्धविराम समझौते में यह भी प्रावधान किया गया है कि सीमावर्ती इलाकों से विस्थापित लोगों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाएगी।   संयुक्त बयान में कहा गया है कि यदि यह युद्धविराम 72 घंटे तक कायम रहता है, तो थाईलैंड अपनी हिरासत में मौजूद 18 कंबोडियाई सैनिकों को रिहा करेगा। सैनिकों की रिहाई अक्टू...
2025 में कुदरत का कहर: दुनिया को 10.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसानक्रिश्चियन एड की रिपोर्ट—जलवायु आपदाओं ने अमेरिका से भारत तक मचाई तबाही
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2025 में कुदरत का कहर: दुनिया को 10.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसानक्रिश्चियन एड की रिपोर्ट—जलवायु आपदाओं ने अमेरिका से भारत तक मचाई तबाही

  वॉशिंगटन। साल 2025 दुनिया के लिए प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज़ से बेहद विनाशकारी साबित हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और राहत संगठन क्रिश्चियन एड की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष लू, जंगलों की आग, सूखा, बाढ़ और भीषण तूफानों जैसी आपदाओं से वैश्विक स्तर पर करीब 10.8 लाख करोड़ रुपये (120 अरब डॉलर) का आर्थिक नुकसान हुआ है।   रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आई आपदाओं ने हर महाद्वीप को प्रभावित किया और दुनिया का कोई भी हिस्सा इससे अछूता नहीं रहा। क्रिश्चियन एड ने 2025 की दस सबसे महंगी प्राकृतिक आपदाओं की सूची जारी की है, जिनमें प्रत्येक आपदा से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ।       कैलिफोर्निया की जंगलों की आग सबसे महंगी आपदा   रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की सबसे महंगी प्राकृतिक आपदा अमेरिका के कैलिफोर्निया में लगी भीषण जंगलों की आग रही, जिससे ...
ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका को घसीटना चाहता है इज़रायल  ट्रंप को मनाने के लिए नेतन्याहू की नई रणनीति, बदला हमला करने का एजेंडा
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ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका को घसीटना चाहता है इज़रायल ट्रंप को मनाने के लिए नेतन्याहू की नई रणनीति, बदला हमला करने का एजेंडा

  वॉशिंगटन/तेल अवीव। इज़रायल और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका को ईरान के खिलाफ नए सिरे से सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार करने की कोशिशों में जुटे हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल इस टकराव से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इज़रायल की रणनीति अमेरिका को अनचाहे युद्ध में फंसा सकती है।   जून महीने में हुए संघर्ष के बाद ट्रंप यह मान चुके हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी हद तक निष्क्रिय हो चुका है। इसी वजह से ईरान उनके मौजूदा विदेश नीति एजेंडे में प्राथमिकता नहीं रह गया है। ऐसे में इज़रायल ने अब अपनी रणनीति बदलते हुए ईरान के परमाणु ठिकानों के बजाय उसकी मिसाइल ताकत को नया खतरा बताकर पेश करना शुरू कर दिया है।       मार-ए-लागो में...
पनडुब्बी से परमाणु प्रहार की क्षमता, K-4 मिसाइल से पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी  पाकिस्तानी एक्सपर्ट का दावा—भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ ताकत ने बदला रणनीतिक संतुलन
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पनडुब्बी से परमाणु प्रहार की क्षमता, K-4 मिसाइल से पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी पाकिस्तानी एक्सपर्ट का दावा—भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ ताकत ने बदला रणनीतिक संतुलन

    भारत द्वारा पनडुब्बी से दागी जाने वाली परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल K-4 के सफल परीक्षण ने पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल की तैनाती से भारत को ऐसी मजबूत सेकंड स्ट्राइक क्षमता मिल गई है, जिसके बाद नई दिल्ली पारंपरिक सैन्य स्तर पर अधिक आक्रामक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।   पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी से जुड़े रणनीतिक विशेषज्ञ और पूर्व ब्रिगेडियर डॉ. जाहिर काजमी ने भारत के इस मिसाइल परीक्षण को इस्लामाबाद की सुरक्षा के लिए “गंभीर चेतावनी” बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आईएनएस अरिघात से K-4 मिसाइल का सफल परीक्षण केवल भारत की समुद्री परमाणु ताकत का विस्तार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को बदलने वाला कदम है।     समंदर से परमाणु प्रतिरोध मजबूत...
ट्रंप के दफ्तर में अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील, दिल्ली में बढ़ी बेचैनी  एक्सपर्ट का दावा—वर्किंग लेवल पर तैयार समझौता, राजनीतिक मंजूरी में देरी
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ट्रंप के दफ्तर में अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील, दिल्ली में बढ़ी बेचैनी एक्सपर्ट का दावा—वर्किंग लेवल पर तैयार समझौता, राजनीतिक मंजूरी में देरी

    भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) पर सहमति लगभग बन चुकी है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक मंजूरी के अभाव में यह डील अटकी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस देरी ने नई दिल्ली में निराशा और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।   सीएनबीसी टीवी18 से बातचीत में द एशिया ग्रुप में पार्टनर और इंडिया प्रैक्टिस के चेयर अशोक मलिक ने दावा किया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील वर्किंग लेवल पर लगभग फाइनल हो चुकी है। दोनों देशों के अधिकारी समझौते के ढांचे से संतुष्ट हैं और अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल अंतिम राजनीतिक फैसले का इंतजार है, जो फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप के दफ्तर में लंबित है।     ‘बातचीत पूरी, फैसला बाकी’   अशोक मलिक के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से बातचीत और मोलभाव चल रहा थ...
समंदर का सिकंदर बनने की ओर चीन, अमेरिकी नौसेना की बढ़ी चिंता एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बी ताकत में भी बराबरी के करीब ड्रैगन
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समंदर का सिकंदर बनने की ओर चीन, अमेरिकी नौसेना की बढ़ी चिंता एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बी ताकत में भी बराबरी के करीब ड्रैगन

    दुनिया के समुद्री संतुलन में बड़ा बदलाव आता दिख रहा है। पेंटागन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की नौसेना (PLA Navy) न केवल जहाजों की संख्या में अमेरिकी नौसेना से आगे निकल चुकी है, बल्कि अब एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बियों जैसी अत्याधुनिक क्षमताओं में भी अमेरिका को चुनौती देने के बेहद करीब पहुंच गई है।   फिलहाल अमेरिकी नौसेना के पास 219 युद्धपोत हैं, जबकि चीन के पास यह संख्या बढ़कर 234 हो चुकी है। अब तक यह माना जाता रहा था कि अमेरिका जैसी समुद्री ताकत बनने में चीन को कई दशक लगेंगे, लेकिन बीते कुछ वर्षों में बीजिंग की तेज़ रफ्तार सैन्य तैयारी ने इस धारणा को बदल दिया है।     एयरक्राफ्ट कैरियर: अमेरिका की बादशाहत को चुनौती   इस समय अमेरिकी नौसेना के पास 11 परमाणु ऊर्जा से संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जो दुनिया के कुल एयरक्राफ्ट कैरियर का लगभग आधा...