Tuesday, May 19

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यूक्रेन में रूसी टैंकों की तबाही: T-72 और T-80 की कब्र, भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत

कीव/मॉस्को: यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध की नई चुनौतियां सामने रख दी हैं। यूक्रेनी सेना ने रूसी टैंकों T-72 और T-80 को बड़े पैमाने पर निशाना बनाकर उन्हें बेकार कर दिया है। यूक्रेन में युद्ध का नया तरीका अपनाते हुए ड्रोन और AI आधारित सिस्टम ने भारी बख्तरबंद टैंकों को भी प्रभावहीन साबित कर दिया है। युद्ध के मैदान में जगह-जगह रूसी टैंकों के कबाड़ देखे जा सकते हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि पारंपरिक टैंकों का युग क्या समाप्त हो रहा है।

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रूस के मिलिट्री-थिंक टैंक CAST ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूस का “ऑब्जेक्ट 195” और “आर्माटा” टैंक प्रोग्राम नई पीढ़ी के मेन बैटल टैंक बनाने में असफल रहा है। इसकी वजह से रूस पुराने T-72 और T-80 मॉडल के मॉडर्न वेरिएंट पर निर्भर रहा है। CAST की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म्स और AI आधारित हवाई हमले भारी भरकम टैंकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यूक्रेन ने कम लागत वाले छोटे ड्रोन का तेजी से उत्पादन किया और इन्हें फ्रंटलाइन पर तैनात किया, जो रूसी टैंकों और सैनिकों के खिलाफ बेहद प्रभावी साबित हुए। CAST ने रूसी सेना को सुझाव दिया है कि उन्हें भारी टैंक और हेलीकॉप्टर पर निवेश करने के बजाय ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

भारत के लिए महत्वपूर्ण संकेत:
भारतीय सेना की बख्तरबंद ताकत भी मुख्य रूप से रूसी प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जैसे T-90 भीष्म और T-72 अजेय। T-72 टैंक युद्ध में लंबे समय तक असर छोड़ने में असफल रहे हैं। भारत ने अपनी T-72 फ्लीट के लिए बड़े इंजन अपग्रेड और एडवांस्ड T-90 वेरिएंट को शामिल करने पर ध्यान दिया है।

  • T-90 भीष्म: भारतीय सेना का प्रमुख मेन बैटल टैंक। लगभग 1,300 यूनिट्स, नवीनतम Mk.3 में डिजिटल बैलिस्टिक कंप्यूटर, ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकर और थर्मल इमेजिंग।

  • T-72 अजेय: 2,400–2,500 यूनिट्स, 40 साल से पुराने, धीरे-धीरे अपग्रेड या बदलने की तैयारी।

सेना का तेजी से स्वदेशीकरण हो रहा है। 2030 तक T-72 फ्लीट को बदलने के लिए फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल (FRCV) और स्वदेशी जोरावर लाइट टैंक का विकास किया जा रहा है। चीन सीमा जैसी ऊंची जगहों पर इन हल्के टैंकों का परीक्षण किया जा रहा है, क्योंकि भारी रूसी MBT को वहां तैनात करना मुश्किल है। इसके अलावा, भारत ने T-72 इंजन अपग्रेड के लिए रूस के साथ 248 मिलियन डॉलर का समझौता भी किया है।

CAST की रिपोर्ट और यूक्रेन युद्ध से मिले सबक साफ हैं: भारी टैंक अब अकेले युद्ध की निर्णायक शक्ति नहीं हैं, और आधुनिक युद्ध में तकनीक, ड्रोन और आधुनिक हथियार ही सफलता की कुंजी हैं।

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