
वॉशिंगटन: सूरज के लगातार सोलर फ्लेयर्स छोड़ने की घटना ने वैज्ञानिकों को सतर्क कर दिया है। 1 फरवरी से सूरज लगातार शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स छोड़ रहा है, जो सीधे धरती तक पहुंच रहे हैं। इसके चलते नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) समेत दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां रेडियो ब्लैकआउट, पावर ग्रिड फेल और सैटेलाइट ऑपरेशन में संभावित रुकावटों को लेकर अलर्ट पर हैं।
सोलर फ्लेयर्स क्या हैं?
सोलर फ्लेयर्स सूरज के अंदर होने वाले चुंबकीय विस्फोट हैं। इन्हें सौर तूफान भी कहा जाता है। जब ये फ्लेयर्स पृथ्वी के वातावरण से टकराते हैं, तो आयनोस्फीयर में हलचल पैदा होती है और हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन, नेविगेशन सिग्नल और सैटेलाइट संचालन प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि ये सीधे इंसानों के लिए खतरा नहीं हैं। ISRO इस समय अपने 50 से अधिक ऑपरेशनल सैटेलाइट पर लगातार नजर रखे हुए है।
4 फरवरी का फ्लेयर सबसे तेज
नासा की स्पेस अलर्ट टीम के अनुसार, 1 फरवरी से शुरू हुए सोलर फ्लेयर्स में 4 फरवरी को सुबह 7.13 बजे (अमेरिकी समयानुसार) एक तेज फ्लेयर अपने चरम पर पहुंचा। अमेरिकी स्पेस एजेंसी की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने इसकी तस्वीर भी कैद की। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना अक्टूबर 2024 के बाद से सबसे चमकदार फ्लेयर थी और 1996 के बाद रिकॉर्ड किए गए 20 सबसे शक्तिशाली फ्लेयर्स में से एक है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में सूरज की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी रुकावट या प्रभावित क्षेत्र की तैयारी की जा सके।