बीजेपी ने एक दिन में पवार और ठाकरे ब्रांड की चमक फीकी नहीं की, कई गलतियां उद्धव और शरद पवार से हुई
मुंबई: महाराष्ट्र के बीएमसी और निकाय चुनावों के नतीजों ने राजनीति की पुरानी परंपराओं को झकझोर दिया है। लंबे समय तक जिन बड़े नेताओं का नाम किसी इलाके में जीत की गारंटी माना जाता था—जैसे ठाकरे परिवार और पवार फैमिली—उनकी चमक इस चुनाव में फीकी पड़ती नजर आई।
मुंबई में 25 साल बाद ठाकरे परिवार बीएमसी की सत्ता गंवा बैठा। उद्धव और राज ठाकरे का साथ इस बार कामयाब नहीं रहा। वहीं पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में शरद पवार और अजित पवार को करारी हार का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि परिवार का नाम जीत की गारंटी है, लेकिन इस बार भाजपा की आंधी ने यह नैरेटिव बदल दिया।
बाल ठाकरे की रणनीति और पार्टी की मजबूती
बाल ठाकरे ने 70 के दशक से मुंबई में शिवसेना की शाखाओं का नेटवर्क मजबूत किया। मराठी मानूस की जरूरतों से जुड़ने और राम मंदिर आंदोलन के दौरान हिंदुत्व को जोड़ने ...










