Saturday, January 17

बीएमसी चुनाव: कई दिग्गज नहीं बचा पाए अपना गढ़, पत्नी-भाई-बहन तक को झेलनी पड़ी हार

 

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शिवसेना के लगभग तीन दशक के वर्चस्व को तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 227 सदस्यीय बीएमसी में भाजपा-नीत गठबंधन को करीब 125 सीटें मिलने का अनुमान है। 74,427 करोड़ रुपये के बजट वाले देश के सबसे समृद्ध नगर निकाय में सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ कई राजनीतिक दिग्गजों का किला भी ढह गया।

 

लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह इस बार भी बीएमसी चुनाव में बड़े नामों को करारी हार झेलनी पड़ी, जबकि कुछ पुराने चेहरे अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहे।

 

दिग्गजों की हार

 

लगातार 25 वर्षों तक नगरसेवक रहे रवि राजा को प्रभाग 185 से पहली बार हार का सामना करना पड़ा। प्रभाग 43 से भाजपा के विनोद मिश्रा भी दूसरी बार चुनाव नहीं जीत सके।

शिंदे गुट की चार बार की नगरसेविका राजुल पटेल को कांग्रेस की दिव्या सिंह ने पराजित किया। एनसीपी नेता नवाब मलिक के भाई कतान मलिक भी चुनावी मैदान में टिक नहीं पाए।

 

कौन-कौन रहे विजयी

 

विजयी दिग्गजों में शिंदे गुट के संजय घाडी, कांग्रेस के असरफ आजमी, एनसीपी (अजित पवार गुट) की डॉ. सईदा खान, शिवसेना (यूबीटी) की श्रद्धा जाधव, भाजपा की तेजस्वी घोषालकर, गणेश खड़कर, मकरंद और हर्षिता नार्वेकर शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस की अंजता यादव और वीजेपी के दीपक तावड़े व तेजिंदर सिंह तिवाना भी जीत दर्ज करने में सफल रहे।

 

चार पूर्व मेयर भी जीते

 

इस चुनाव में चार पूर्व महापौरों ने भी जीत हासिल की। इनमें शिवसेना (यूबीटी) के मिलिंद वैय, विशाखा राउत, किशोरी पेडणेकर और प्रभाग 202 से श्रद्धा जाधव शामिल हैं।

 

विचारे परिवार को बड़ा झटका

 

शिवसेना में विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहे पूर्व सांसद राजन विचारे को अपने गढ़ ठाणे में बड़ा झटका लगा है। उनकी पत्नी नंदिनी विचारे, जो मौजूदा नगरसेविका थीं, वॉर्ड 12 से भाजपा की काजोल गुणीजन से 2111 वोटों से हार गईं। काजोल गुणीजन को 12,355 जबकि नंदिनी विचारे को 10,244 मत मिले। यह विचारे परिवार की लगातार तीसरी चुनावी हार है।

 

भाजपा के दिग्गज को भाजपा के बागी ने हराया

 

भिवंडी मनपा चुनाव में भाजपा के पूर्व विपक्ष नेता श्याम अग्रवाल को पार्टी के ही बागी निर्दलीय उम्मीदवार नितेश ऐनकर ने महज 21 वोटों से पराजित कर दिया।

वहीं भाजपा के नारायण रतन चौधरी ने सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी रविकांत पाटील को 7,038 वोटों से हराया।

 

पिता-पुत्र की प्रतिष्ठा की लड़ाई

 

पूर्व महापौर विलास पाटील के पुत्र एडवोकेट मयूरेश पाटील और भाजपा विधायक महेश चौघुले के पुत्र मित चौघुले पहली बार आमने-सामने चुनाव मैदान में थे। इस प्रतिष्ठा की लड़ाई में मयूरेश पाटील ने मित चौघुले को 1,697 वोटों से पराजित किया।

 

 

निष्कर्ष

बीएमसी चुनावों ने साफ कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने सिर्फ दल नहीं, बल्कि चेहरे और प्रदर्शन को भी परखा। कई स्थापित राजनीतिक परिवारों के लिए यह चुनाव चेतावनी बनकर सामने आया है कि पारंपरिक गढ़ और नाम अब जीत की गारंटी नहीं रहे।

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