परमाणु ऊर्जा में निजी कंपनियों की एंट्री: समय की मांग या सुरक्षा चुनौती? 5 अहम सवाल
नई दिल्ली: भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा और दूरगामी बदलाव लाते हुए सस्टेनेबल हानेंसिंग ऐंड अडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल संसद से पारित हो गया और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई। इस कानून के तहत अब निजी कंपनियां सरकार से लाइसेंस लेकर परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित और चला सकेंगी। सरकार का दावा है कि यह भारत को साफ, भरोसेमंद और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जाएगा।
न्यूक्लियर ऊर्जा में बदलाव:
पहले तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन का अधिकार केवल केंद्र और उसकी कंपनियों तक सीमित था। SHANTI बिल के बाद टाटा पावर, अदाणी, L&T जैसी निजी कंपनियां भी परमाणु संयंत्र चला सकेंगी। इस पहल का उद्देश्य 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
सरकार का नियंत्रण:
यूरेनियम और थोरियम के खनन और उच्च-स्तरीय परमाणु अपशिष्ट प्रब...










