Monday, January 12

भारतीय सेना बदलेगी फिटनेस टेस्ट का तरीका, अग्निवीरों से अफसरों तक सभी पर लागू होगा

भारतीय सेना अगले प्रशिक्षण वर्ष से फिजिकल फिटनेस टेस्ट (PFT) के तरीके में बड़ा बदलाव करने जा रही है। यह नई प्रक्रिया जवानों और अफसरों के सभी स्तरों पर लागू होगी। इसका उद्देश्य सैन्यकर्मियों को केवल टेस्ट पास करने की उलझनों में उलझाने की बजाय, वास्तविक फिटनेस बनाए रखने और युद्ध की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने का है।

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फिलहाल की प्रक्रिया
अब तक सेना में बैटल प्रिपेयर्डनेस एफिशिएंसी टेस्ट (BPET) और फिजिकल प्रोफिशिएंसी टेस्ट (PPT) हर तीन महीने में आयोजित होते हैं। BPET में 5 किलोमीटर दौड़, रस्सियों से चढ़ाई, 9 फीट गड्ढे में कूद और 60 मीटर स्प्रिंट शामिल है। PPT में 3.2 किलोमीटर दौड़, चिन-अप्स, सिट-अप्स, 5 मीटर शटल और 100 मीटर स्प्रिंट का परीक्षण होता है।

इस प्रक्रिया में जवानों का ध्यान लगातार अगले टेस्ट की तैयारी में बँध जाता है और उम्र के अनुसार दौड़ की लंबाई व अन्य मापदंड बदलते रहते हैं।

कंबाइंड फिजिकल टेस्ट (CFT) के तहत बदलाव
2026-27 ट्रेनिंग ईयर से साल में सिर्फ दो बार एक ही कंबाइंड फिजिकल टेस्ट (CFT) आयोजित किया जाएगा। इसमें BPET और PPT के प्रमुख टेस्ट को मिलाकर आयोजित किया जाएगा।

45 साल से कम उम्र के जवानों के लिए 3.2 किलोमीटर दौड़, रस्सियों पर चढ़ाई, पुश-अप और सिट-अप होंगे।
45 साल से ऊपर के जवानों को दौड़/वॉकिंग करनी होगी, हथियारों के साथ या बिना।
55 से 60 साल के अफसरों के लिए यह टेस्ट स्वयं-निगरानी के तहत होगा।

प्रत्येक टेस्ट के बाद संतोषजनक, अच्छा, शानदार और बहुत शानदार ग्रेड दिए जाएंगे, जिसमें अधिकतम अंक 60 और न्यूनतम 38 होंगे। यह प्रक्रिया महिला सैन्यकर्मियों पर भी लागू होगी।

बदलाव की वजह
सेना के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हर तिमाही टेस्ट प्रणाली से जवानों का ध्यान केवल फिटनेस टेस्ट पर रहता है। नए सिस्टम से अब उन्हें अपनी फिटनेस बनाए रखने के साथ अन्य सैन्य गतिविधियों पर फोकस करने का ज्यादा समय मिलेगा। टेस्ट की संख्या कम होने के बावजूद फिटनेस मानक वही रहेंगे।

सेना मुख्यालय के अनुसार, इस बदलाव पर अक्टूबर 2025 में प्रस्ताव भेजा गया था और दिसंबर तक देशभर के सैनिकों से प्रतिक्रिया ली गई। 1 जनवरी, 2026 से ट्रायल और 1 अप्रैल से नई गाइडलाइंस** लागू होने की संभावना है।

यह कदम भारतीय सेना की फिटनेस और युद्ध-तैयारी क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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