निजी स्कूलों में गरीबों के लिए आरक्षण जरूरी, लेकिन केवल सीटें देने से बदलाव नहीं होगा
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में याद दिलाया कि शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। हालांकि, यह आरक्षण केवल ‘सीट’ देने तक सीमित रह गया तो असली बदलाव नहीं आएगा। अर्थशास्त्र का बुनियादी सिद्धांत यह है कि किसी भी नीति का मूल्यांकन उसके नेक इरादों से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणाम से होना चाहिए। शिक्षा के संदर्भ में इसका मतलब है—क्या बच्चा सचमुच सीख रहा है, क्या वह स्कूल में टिक पा रहा है, और क्या उसकी क्षमताएं भविष्य के प्रतिस्पर्धी माहौल के लिए तैयार कर रही हैं।
सीखने की छिपी हुई लागत
अक्सर हम शिक्षा को केवल 'सीट' या 'फीस' तक सीमित कर देते हैं। जबकि स्कूल की फीस ही एक मात्र खर्च नहीं है। गरीब परिवारों के लिए किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी, प्रोजेक्ट्स का सामान और परिवहन का खर्च भी काफी होता है। यह खर्च कभी-कभी परिवार ...










