Friday, January 23

ब्रिक्स समिट से पहले भारत आ रहे लूला दा सिल्वा ग्लोबल साउथ के नेतृत्व और भारत–ब्राजील साझेदारी पर होगा बड़ा मंथन

नई दिल्ली।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा की फरवरी में प्रस्तावित भारत यात्रा को सामान्य कूटनीतिक दौरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले उनका भारत आना इस बात का संकेत है कि ग्लोबल साउथ के नेतृत्व को लेकर भारत और ब्राजील किसी बड़े साझा एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

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राष्ट्रपति लूला 19 से 21 फरवरी तक भारत में रहेंगे। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। लूला के भारत दौरे के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन में भाग लेने की भी संभावना है, जिसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई वैश्विक नेता शामिल होंगे। हालांकि, लूला की यात्रा का महत्व केवल एआई समिट तक सीमित नहीं है।

ट्रंप की टैरिफ नीति के मुखर विरोधी हैं लूला

भारत और ब्राजील, दोनों ही देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से सीधे प्रभावित रहे हैं। लूला दा सिल्वा इन नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं। ऐसे में उनका भारत दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था दबाव में है और विकासशील देशों की साझा आवाज की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदर्भ में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा,
ग्लोबल साउथ के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए भारत और ब्राजील के बीच करीबी सहयोग अत्यंत आवश्यक है।”
यह टिप्पणी दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक तालमेल को स्पष्ट करती है।

ब्रिक्स के जरिए बहुपक्षवाद पर जोर

भारत और ब्राजील न केवल ग्लोबल साउथ की गोलबंदी के समर्थक हैं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था के प्रबल पक्षधर भी रहे हैं। दोनों देश ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य हैं और इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।

ब्रिक्स का एक प्रमुख एजेंडा आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर के विकल्प तलाशना है। यही मुद्दा अमेरिकी प्रशासन को असहज करता रहा है। पिछले वर्ष भारत और ब्राजील पर लगाए गए भारी टैरिफ के पीछे भी ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका को एक अहम वजह माना गया।

वैश्विक अस्थिरता के दौर में अहम दौरा

लूला की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिकी नीतियों के चलते वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ी है। टैरिफ युद्ध, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर बयानबाजी, ईरान को लेकर तनाव और पश्चिमी देशों के भीतर उभरते मतभेद—इन सबने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अनिश्चित बना दिया है।

इसी पृष्ठभूमि में गाजा संघर्ष को लेकर प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत और ब्राजील को आमंत्रित किया गया है, हालांकि दोनों देशों ने फिलहाल इससे दूरी बनाए रखी है।

भारत–ब्राजील की रणनीतिक समानताएं

भारत और ब्राजील के बीच कई ऐतिहासिक और रणनीतिक समानताएं हैं। दोनों देश उपनिवेशवाद से बाहर निकलकर मजबूत लोकतंत्र के रूप में उभरे हैं। बड़ी आबादी, विशाल घरेलू बाजार और औद्योगीकरण की समान पृष्ठभूमि ने दोनों देशों को प्राकृतिक साझेदार बनाया है।

रक्षा, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। यही कारण है कि भारत–ब्राजील संबंध मौजूदा और भविष्य की जियोपॉलिटिक्स में लगातार अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

ग्लोबल साउथ को नेतृत्व देने की तैयारी

ब्रिक्स के हालिया विस्तार के बाद भारत और ब्राजील की साझेदारी और अधिक अहम हो गई है। ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और वैश्विक जीडीपी में इनका हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत है।
ऐसे में भारत और ब्राजील, ब्रिक्स के मंच के जरिए ग्लोबल साउथ को एकजुट नेतृत्व देने की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं—और लूला दा सिल्वा की यह भारत यात्रा उसी दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

 

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