
नई दिल्ली।
जनवरी के आखिरी दिनों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में तेज सर्द हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई, जिससे जहां तापमान में गिरावट आई है, वहीं लंबे समय से प्रदूषण से जूझ रहे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का पूर्वानुमान सटीक साबित हुआ है।
मौसम विभाग ने पहले ही 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं, बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की थी। इसके साथ ही 9 राज्यों में भारी बारिश, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और उत्तर भारत के 17 जिलों में शीतलहर का अलर्ट भी दिया गया था।
फिर गिरेगा पारा, सर्दी बढ़ने के आसार
शुक्रवार सुबह से दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में दर्ज की गई असामान्य गर्मी के बाद अब ठंड फिर से तेज होगी।
पश्चिमी विक्षोभ से बदला मौसम
IMD के अनुसार, उत्तर भारत इस समय एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में है। इसी वजह से तड़के से आसमान में बादल छाए रहे और कई इलाकों में बारिश हुई। विभाग ने चेतावनी दी है कि दिन में बाद में भी बारिश, तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है।
22 और 23 जनवरी को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा और हिमपात हो सकता है।
क्या होता है पश्चिमी विक्षोभ
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी प्रणाली है, जो मुख्य रूप से भूमध्य सागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर सर्दियों में भारत, पाकिस्तान और नेपाल तक पहुंचती है। यह प्रणाली अपने साथ नमी लाती है, जिससे उत्तर भारत में अचानक बारिश और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी होती है।
रबी फसलों, खासकर गेहूं के लिए यह बारिश अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
शिमला में तीन महीने बाद बर्फबारी
इस बीच, शिमला में शुक्रवार को इस मौसम की पहली बर्फबारी दर्ज की गई, जिससे तीन महीने से जारी सूखे का अंत हुआ। मनाली समेत हिमाचल प्रदेश के कई ऊंचाई वाले इलाकों में भी बर्फबारी की खबर है। जम्मू के कई हिस्सों में बारिश के साथ ठंड का असर बना हुआ है।
बारिश से सुधरेगी दिल्ली की हवा
दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गुरुवार को ही हल्का सुधार दर्ज किया गया था। सुबह 8 बजे औसत AQI 313 (अत्यंत खराब) रहा, जो एक दिन पहले 330 था।
तेज हवाओं और बारिश के कारण हवा में मौजूद प्रदूषक कण नीचे बैठेंगे, जिससे AQI में और सुधार होने की उम्मीद है।
क्या है ‘गरजता चालीसा’
‘गरजता चालीसा’ (Roaring Forties) दक्षिणी गोलार्ध में 40° से 50° दक्षिण अक्षांश के बीच चलने वाली अत्यंत तेज पछुआ हवाओं को कहा जाता है। यह नाम समुद्री नाविकों ने दिया था, क्योंकि इन हवाओं के कारण समुद्र में ऊंची और उग्र लहरें उठती हैं।
यूरोप से ऑस्ट्रेलिया की समुद्री यात्रा करने वाले नाविक इन हवाओं का उपयोग तेज गति से पूर्व दिशा में जाने के लिए करते थे।
पश्चिमी विक्षोभ से कोई सीधा संबंध नहीं
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, गरजता चालीसा और पश्चिमी विक्षोभ के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।
जहां पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी गोलार्ध में भूमध्य सागर से निकलकर भारत में सर्दियों की बारिश लाता है, वहीं गरजता चालीसा दक्षिणी गोलार्ध की वायुमंडलीय घटना है।