Friday, May 15

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जब तक कर्जमाफी नहीं, तब तक महायुति को वोट न दें – मराठवाड़ा में गरजे उद्धव ठाकरे

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मुंबई/धाराशिव | प्रतिनिधि
महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों के ऐलान के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है। मराठवाड़ा के दौरे पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महायुति सरकार (भाजपा, एनसीपी और शिवसेना-शिंदे गुट) पर जोरदार हमला बोला। ठाकरे ने किसानों से अपील की –

“जब तक कर्जमाफी नहीं मिलती, तब तक महायुति को वोट न दें।”

उद्धव ठाकरे ने धाराशिव जिले से अपने चार दिवसीय मराठवाड़ा दौरे की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। कई किसानों ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें मुआवजे के रूप में सिर्फ तीन से 21 रुपये तक की राशि मिली है। किसानों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि उन्हें पूर्ण कर्जमाफी चाहिए।

ठाकरे ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दिवाली से पहले किसानों को सहायता राशि देने की घोषणा की गई थी, लेकिन दिवाली बीत गई और किसानों के खाते अब भी खाली हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र से आई सर्वे टीम रात में टॉर्च लेकर नुकसान का आकलन कर रही है — “क्या ऐसे सर्वे से सच्चाई सामने आएगी?”

ठाकरे ने किसानों से अपील की –

“अपने खेतों में बोर्ड लगाएं — जब तक कर्जमाफी नहीं, तब तक वोट नहीं!

फडणवीस-शिंदे का पलटवार

ठाकरे के इस बयान पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे चुनावी माहौल में किसानों की भावनाओं से खेल रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमें खुशी है कि वे दौरे पर निकले हैं, लेकिन वोटर लिस्ट की आड़ में चुनावी माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है।”

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि किसानों की कर्जमाफी के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है —

“किसानों को 30 जून 2026 तक कर्जमाफी दी जाएगी। इसके लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जा चुका है। विपक्ष सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए किसानों को गुमराह कर रहा है।”

मराठवाड़ा में गरमा रही है सियासत

मराठवाड़ा क्षेत्र में किसानों के मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर उद्धव ठाकरे किसानों से सीधे संवाद कर सरकार को घेरने की रणनीति में हैं, तो दूसरी ओर महायुति सरकार अपनी योजनाओं और राहत पैकेजों को जनता के सामने रख रही है।

राज्य के गन्ना उत्पादक जिलों में भी किसान समर्थन मूल्य को लेकर आक्रोशित हैं। हाल ही में कोल्हापुर में उपमुख्यमंत्री फडणवीस के काफिले पर किसानों ने गन्ना फेंककर विरोध जताया।

स्थानीय निकाय चुनावों के नजदीक आते ही महाराष्ट्र की सियासत किसान बनाम सरकार के मुद्दे पर गर्म हो चुकी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन सकता है।

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