Thursday, May 14

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माँ के वात्सल्य और संवेदनाओं से सराबोर हुई ‘सरल काव्यान्जलि’ की मासिक गोष्ठी

काव्य पाठ, पुस्तक समीक्षा और रक्तदाता सम्मान ने कार्यक्रम को बनाया भावपूर्ण

उज्जैन।
मदर्स डे के अवसर पर आयोजित ‘सरल काव्यान्जलि’ की मासिक साहित्यिक गोष्ठी माँ के स्नेह, संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों को समर्पित रही। कविताओं, साहित्य चर्चा और सम्मान समारोह से सजे इस आयोजन में साहित्यकारों और कवियों ने भावनाओं से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के माध्यम से माँ के महत्व को शब्दों में पिरोया।

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कार्यक्रम में जब वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वंदना गुप्ता ने अपनी मार्मिक पंक्तियाँ —
“माँ की चिन्ता में ही घर की दुआएँ बसती हैं,
बेटियों की आँखों में उसकी व्यथाएँ बसती हैं,
बेटे चुप रहकर भी सहारा बन खड़े रहते हैं,
बहुओं के स्नेह से ही घर में ऋचाएँ बसती हैं…”
— प्रस्तुत कीं, तो पूरा सभागार भावुक हो उठा।

संस्था के सचिव मानसिंह शरद ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता ख्यात कला गुरु डॉ. श्रीकृष्ण जोशी ने की। मुख्य अतिथियों में मुकेश जोशी, वरिष्ठ पार्षद डॉ. रवि राय एवं वरिष्ठ साहित्यकार जी.के. निगम शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र देवधरे दर्पण ने किया।


कहानी संग्रह पर हुई विशेष चर्चा

कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. वसुधा गाडगिल के कहानी संग्रह “रंग से रश्मियों तक” की समीक्षा का वाचन संतोष सुपेकर द्वारा किया गया, जिसे उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने सराहा।


रक्तदाता नितिन पोळ का हुआ सम्मान

मानव सेवा और सामाजिक योगदान के लिए संस्था के वरिष्ठ सदस्य नितिन पोळ का विशेष सम्मान किया गया। उन्होंने अब तक 12 बार रक्तदान कर जरूरतमंदों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


कवियों ने प्रस्तुत की भावपूर्ण रचनाएँ

गोष्ठी में डॉ. सीमा पंड्या, आशागंगा शिरढ़ोणकर, डॉ. आर.पी. तिवारी, डॉ. नेत्रा रावणकर, डॉ. रफीक नागौरी, हर्ष सैनी, वी.एस. गहलोत, तरुण उपाध्याय, वर्षा गर्ग, अशोक रक्ताले, धनसिंह चौहान, डॉ. विक्रम विवेक, हरदीप दायले, डॉ. एस.के. यादव एवं राजेश राज सहित अनेक साहित्यकारों ने कविता पाठ किया।


श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक गरिमा के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि स्वागत से हुआ, जिसे अशोक रावणकर ने संपन्न किया। सरस्वती वंदना सुगनचंद्र जैन ने प्रस्तुत की, जबकि राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल की कविता “शहीदों श्रद्धा सहित प्रणाम” का प्रभावशाली वाचन नृसिंह इनानी ने किया।

हाल ही में दिवंगत हुए उज्जैन निवासी एवं अमर शहीदों के पूजक अभय मराठे को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन वी.एस. गहलोत ने किया।

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