
89 हेक्टेयर से बढ़कर 200 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा विस्तार, विशाल संग्रहालय भी बनेगा

इंदौर, 12 मई 2026।
धार जिले में स्थित डायनासोर नेशनल पार्क को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और वैज्ञानिक दृष्टि से विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पार्क के विस्तार, विकास और मास्टर प्लान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में संभागायुक्त कार्यालय इंदौर से उपायुक्त राजस्व सपना लोवंशी उपस्थित रहीं। वहीं धार से मुख्य वन संरक्षक टी.एन. मिश्रा, जिला वन मंडलाधिकारी विजय मंथन तथा अभिनव प्राइवेट लिमिटेड के कंसल्टेंट कौश्तुभ कुर्लेकर बैठक में शामिल हुए।
बैठक के दौरान डायनासोर नेशनल पार्क से संबंधित मास्टर प्लान, बेसलाइन स्टडी एवं कंसल्टेंट द्वारा तैयार प्रस्ताव की समीक्षा की गई। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने बताया कि वर्तमान में धार क्षेत्र में 89 हेक्टेयर क्षेत्र में जीवाश्म पार्क संचालित है, जहां डायनासोर की हड्डियां, अंडे, मल तथा विभिन्न जीव-जन्तुओं के जीवाश्म संरक्षित हैं। इनमें इकाइनोडर्मा, मोलस्का, मछली और पोरिफेरा प्रजातियों के जीवाश्म भी शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि पर्यटकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए अब इस पार्क का विस्तार कर इसे 200 हेक्टेयर क्षेत्र तक विकसित किया जाएगा। इसके लिए धार जिले के चार गांवों की भूमि को शामिल किया गया है। पार्क को पर्यटन और शोध का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से यहां अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बनेगा विशाल डायनासोर संग्रहालय
डायनासोर नेशनल पार्क में एक विशाल और आधुनिक संग्रहालय का निर्माण भी प्रस्तावित है, जहां डायनासोर के जीवाश्म, हड्डियां, अंडे तथा अन्य दुर्लभ अवशेष प्रदर्शित किए जाएंगे। यह संग्रहालय पर्यटकों और शोधार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध क्षेत्र
बैठक में जानकारी दी गई कि पार्क क्षेत्र में बड़केश्वर महादेव मंदिर और हनुमान मंदिर जैसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं। वहीं बाघ गुफाएं और बाघ किला जैसे ऐतिहासिक स्थल भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान हैं।
यह क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। यहां अरण्डी, शीशम, सतावर और सागवान सहित अनेक औषधीय एवं वनस्पति प्रजातियों के लगभग 1644 पौधे पाए जाते हैं। साथ ही सियार, लोमड़ी, लकड़बग्घा और विभिन्न प्रजातियों के सांप जैसे वन्यजीव भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं।
पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
पार्क के विकास के तहत होटल, रिसोर्ट, टावर एवं आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सड़कों का चौड़ीकरण और नई सड़कों का निर्माण भी प्रस्तावित है। साथ ही रात्रिकालीन पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि पार्क के विस्तारित होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त नियम लागू होंगे
बैठक में स्पष्ट किया गया कि पार्क क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। यहां उत्खनन, ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, जलाऊ लकड़ी का व्यावसायिक उपयोग, ईंट भट्टों की स्थापना तथा प्राकृतिक जल स्रोतों में अनुपचारित अपशिष्ट छोड़ने जैसी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।


