
नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक और कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है। Delhi Police ने भारतीय युवा कांग्रेस के गिरफ्तार सदस्यों के खिलाफ अब दंगा करने और दंगा भड़काने की धाराएं भी जोड़ दी हैं।
पुलिस ने Indian Youth Congress के अध्यक्ष Uday Bhanu Chib को प्रदर्शन का “मुख्य साजिशकर्ता” बताते हुए गिरफ्तार किया है। अब तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
क्या हैं आरोप?
गिरफ्तारी मेमो के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने Bharat Mandapam में कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से एकत्र होकर सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, ‘राष्ट्रविरोधी नारे’ लगाए और “दंगे जैसी स्थिति” पैदा करने का प्रयास किया।
दिल्ली की एक अदालत ने चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(1) (दंगा) और 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) को जोड़ा है। इसके अलावा धारा 196 (समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाना) और 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक बयान) सहित अन्य धाराएं भी प्राथमिकी में शामिल की गई हैं।
पुलिस का पक्ष
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध व मीडिया प्रकोष्ठ) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने आरोपियों को “आक्रामक तत्व” बताते हुए कहा कि 20 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था भंग करने की पूर्वनियोजित कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को काबू में करते समय कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं। जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। मामले को व्यापक साजिश मानते हुए जांच अपराध शाखा के अंतर-राज्यीय प्रकोष्ठ को सौंप दी गई है।
कैसे हुआ प्रदर्शन?
जानकारी के अनुसार, युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन स्थल के हॉल नंबर-पांच में कमीज उतारकर और सरकार व भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में नारे लिखी टी-शर्ट दिखाकर प्रदर्शन किया।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने कार्यक्रम स्थल में प्रवेश के लिए क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कराया था।
राजनीतिक घमासान
घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे “वैश्विक मंच पर भारत की छवि धूमिल करने वाला कृत्य” बताया है, जबकि युवा कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए किया गया “शांतिपूर्ण विरोध” करार दिया है।
एआई सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विरोध की सीमाओं को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर अदालत और अपराध शाखा की जांच पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह मामला महज विरोध प्रदर्शन था या सुनियोजित कानून-व्यवस्था भंग करने की साजिश।
