
नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar से जुड़े विमान हादसे की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जिस निजी विमान का इस्तेमाल किया गया था, उसकी समय पर मेंटेनेंस नहीं कराई गई थी। जांच के दौरान Directorate General of Civil Aviation (डीजीसीए) को संबंधित विमानों के मेंटेनेंस रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं कराए गए।
बताया जा रहा है कि वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के तहत संचालित लीयरजेट 40/45 श्रेणी के विमान—रजिस्ट्रेशन नंबर VT-VRA, VT-VRS, VT-VRV और VT-TRI—को विशेष सुरक्षा ऑडिट के बाद ग्राउंड कर दिया गया है।
रिकॉर्ड न मिलने से बढ़ा शक
सूत्रों के मुताबिक, मेंटेनेंस लॉग बुक, सर्विसिंग रिकॉर्ड और उड़ान घंटों का विवरण उपलब्ध नहीं होने से डीजीसीए यह सत्यापित नहीं कर पा रहा है कि विमानों की समयबद्ध जांच और पुर्जों का प्रतिस्थापन हुआ था या नहीं।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि संबंधित विमान को निर्धारित सीमा से अधिक उड़ाया गया और जरूरी तकनीकी जांच समय पर नहीं कराई गई। यदि यह आशंका सही पाई जाती है, तो यह गंभीर सुरक्षा उल्लंघन माना जाएगा।
विशेष ऑडिट में सामने आईं कमियां
डीजीसीए द्वारा की गई स्पेशल सिक्योरिटी ऑडिट के दौरान कंपनी के कई विमानों में खामियां पाई गईं। जब तक सभी तकनीकी कमियां दूर नहीं की जातीं और लापता रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जाते, तब तक इन विमानों को उड़ान की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या वीआईपी ड्यूटी में इस्तेमाल होने वाले विमानों के साथ लापरवाही बरती गई। यह आशंका भी जताई जा रही है कि कुछ निजी ऑपरेटर उड़ान घंटों के रिकॉर्ड में विसंगति दिखाकर अधिक समय तक विमानों का उपयोग कर रहे हैं।
अन्य एयरलाइंस भी रडार पर
जानकारी के अनुसार, डीजीसीए ने कुछ अन्य छोटी एयरलाइंस का भी सुरक्षा ऑडिट किया है, जिनमें कथित तौर पर गंभीर कमियां मिली हैं। नियामक अब इन ऑपरेटरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि मेंटेनेंस रिकॉर्ड किसी भी विमान की “तकनीकी कुंडली” होता है। इसके अभाव में उड़ान सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जांच पर टिकी निगाहें
अजीत पवार से जुड़े इस विमान हादसे ने निजी विमानन कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब निगाहें डीजीसीए की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह मामला महज प्रशासनिक लापरवाही था या गंभीर आपराधिक चूक।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह प्रकरण निजी विमानन क्षेत्र में सख्त नियामकीय सुधारों की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
