
पटना: झारखंड के चतरा में हुए दर्दनाक एयर एंबुलेंस हादसे ने राजधानी पटना के कुर्जी इलाके में गहरा मातम बिखेर दिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले 24 वर्षीय पैरामेडिकल स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। जिस घर ने बचपन में पिता को खोया, वहीं अब परिवार की उम्मीदों का ‘चिराग’ भी बुझ गया।
बताया जाता है कि हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई थी। सभी रांची से दिल्ली जा रहे थे।
बचपन में ही छिन गया था पिता का साया
मूल रूप से सीवान जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र के टेलकथू गांव के रहने वाले सचिन का परिवार पिछले 15 वर्षों से पटना के कुर्जी में किराए के मकान में रह रहा था। बचपन में ही पिता जितेंद्र मिश्रा के निधन के बाद परिवार पर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा।
बड़े भाई विनीत मिश्रा, जो पेशे से पुजारी हैं, ने सचिन को बेटे की तरह पाला और पढ़ाया-लिखाया। परिवार को उम्मीद थी कि अब हालात संभल रहे हैं। मंझले भाई गुजरात में सेफ्टी ऑफिसर हैं, जबकि सबसे छोटा भाई पढ़ाई कर रहा है। एक बहन भी है।
विनीत मिश्रा भावुक होकर कहते हैं, “पिता के बाद वही घर की उम्मीद था। उसे बेटे की तरह पाला। उसके बिना परिवार अधूरा हो गया।”
तीन साल से कर रहे थे सेवा
परिजनों के अनुसार, सचिन वर्ष 2017 से नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े थे। बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे पिछले तीन वर्षों से ‘रेड बर्ड एयर एंबुलेंस’ में पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में कार्यरत थे।
सोमवार देर रात करीब एक बजे हादसे की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां बेसुध हो गईं।
शव लाने में भी झेलनी पड़ी मुश्किलें
हादसे की सूचना मिलते ही परिजन निजी वाहन से झारखंड के लिए रवाना हुए। मंगलवार शाम वे सड़क मार्ग से शव लेकर पटना पहुंचे।
विनीत मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस कठिन समय में न तो ‘रेड बर्ड’ कंपनी का कोई अधिकारी मदद के लिए आगे आया और न ही झारखंड सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि शव को पटना लाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
दीघा घाट पर अंतिम विदाई
कुर्जी में जैसे ही सचिन का पार्थिव शरीर पहुंचा, स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। दीघा घाट पर पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। बड़े भाई विनीत मिश्रा ने मुखाग्नि दी।
परिजनों ने हादसे की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
एक संघर्षशील बेटे की यह असमय विदाई न केवल परिवार, बल्कि पूरे इलाके के लिए अपूरणीय क्षति बन गई है।
