
करनाल, 24 फरवरी 2026: आज से 287 साल पहले, 24 फरवरी 1739 को भारत के इतिहास का एक अहम युद्ध हुआ — करनाल का युद्ध। यह वही लड़ाई थी जिसने मुगलों के पतन की नींव रख दी और भारत का बहुमूल्य कोहिनूर हीरा लूट लिया गया।
करनाल का पुराना नाम और महत्व
हरियाणा के करनाल शहर को प्राचीन काल में कर्णताल कहा जाता था। कहा जाता है कि महाभारत के प्रसिद्ध राजा कर्ण ने यहां ताल बनवाई थी और सूर्य की पूजा के लिए स्नान किया करते थे।
युद्ध कब और किसके बीच हुआ?
करनाल का युद्ध मुगल सम्राट मोहम्मद शाह और पर्शिया के राजा नादिर शाह के बीच लड़ा गया। नादिर शाह ने पहले अफगानिस्तान पर कब्जा किया और फिर भारत की ओर बढ़े। मुगलों की विशाल सेना, जिसमें करीब 3 लाख सैनिक और युद्ध के लिए हाथी शामिल थे, नादिर शाह की 50 हजार की अनुभवी और आधुनिक हथियारों से लैस सेना के सामने टिक न सकी।
सिर्फ 3 घंटे में समाप्त युद्ध
इतिहासकारों के अनुसार, नादिर शाह की सेना ने पहले आग के गोले दागने शुरू किए। मुगलों के हाथी और सैनिक आसानी से निशाने पर आए। दो कमांडर घायल और कब्जे में आ गए। 2 घंटे के भीतर मुगल सेना बिखर गई और तीसरे घंटे तक युद्ध समाप्त हो गया।
दिल्ली पर क़ब्ज़ा और कोहिनूर की लूट
करनाल की जीत के बाद नादिर शाह दिल्ली की ओर बढ़े। उन्होंने दिल्ली में हजारों लोगों का कत्लेआम किया और सोने-हीरे की लूट मचाई। उनके कब्जे में आया शाहजहां का मोर वाला सिंहासन और भारत का बहुमूल्य कोहिनूर हीरा, जो बाद में पर्शिया ले जाया गया और अंततः ब्रिटेन की महारानी के ताज में शामिल हुआ।
मुगलों पर असर
करनाल का युद्ध भारत में मुगल साम्राज्य के पतन का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। युद्ध के बाद मुगलों की आर्थिक और सैन्य शक्ति कमजोर हुई। बंगाल, अवध, हैदराबाद, मराठा और सिख राज्यों का उदय हुआ और मुगल सल्तनत धीरे-धीरे टूटने लगी। इसके कुछ समय बाद ही भारत पर अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हुआ।
करनाल की लड़ाई यह याद दिलाती है कि इतिहास में कुछ घण्टों के युद्ध भी एक पूरी सभ्यता की दिशा बदल सकते हैं।
