Tuesday, February 24

लुटियंस की प्रतिमा हटाकर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित, पीएम ने कहा— “अद्भुत पहल”

नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026। देश की राजधानी स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ के अवसर पर एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बना। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने ब्रिटिश वास्तुकार Edwin Lutyens की प्रतिमा के स्थान पर स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल C. Rajagopalachari (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।

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इस अवसर को देश के औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ने और भारतीय विरासत को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पीएम मोदी ने बताया “अद्भुत पहल”

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति भवन की पोस्ट को साझा करते हुए ‘राजाजी उत्सव’ को “अद्भुत पहल” बताया। उन्होंने लिखा कि यह उत्सव राष्ट्र के प्रति राजाजी के समृद्ध योगदान के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है और लोगों से इसमें भाग लेकर प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

इससे एक दिन पहले अपने रेडियो कार्यक्रम Mann Ki Baat में प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश अब गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान से जुड़े प्रतीकों को महत्व दे रहा है। उन्होंने ‘पंच प्राण’ का उल्लेख करते हुए गुलामी की मानसिकता से मुक्ति को राष्ट्रनिर्माण की दिशा में आवश्यक कदम बताया।

कौन थे राजाजी?

सी. राजगोपालाचारी, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘राजाजी’ कहा जाता है, स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में रहे और अपने नैतिक आचरण, आत्मसंयम तथा स्वतंत्र चिंतन के लिए विख्यात थे।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि राजाजी ने सत्ता को पद नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी और सिद्धांतनिष्ठा आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ने का संकेत

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि दुर्भाग्यवश आजादी के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां बनी रहीं, जबकि देश के महान सपूतों को वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे अधिकारी थे। लुटियंस की प्रतिमा हटाकर राजाजी की प्रतिमा स्थापित करना इसी सोच का प्रतीक है।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ के तहत विशेष प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी।

यह कदम केवल एक प्रतिमा परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की आत्मपहचान, सांस्कृतिक गौरव और स्वतंत्र चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सशक्त संदेश माना जा रहा है

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