
लखनऊ, 24 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से रिश्तों को झकझोर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। आशियाना क्षेत्र के सेक्टर-एल में 21 वर्षीय युवक ने अपने 49 वर्षीय पिता की गोली मारकर हत्या कर दी और शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में भर दिए। इस वारदात ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है।
डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता, बेटा करना चाहता था बिजनेस
मृतक मानवेंद्र सिंह शहर में पैथोलॉजी लैब चलाते थे। वे चाहते थे कि उनका बेटा अक्षत प्रताप सिंह डॉक्टर बने और भविष्य में उनका काम संभाले। इसके लिए उन्होंने अक्षत के खाते में पांच लाख रुपये भी ट्रांसफर किए थे और नीट परीक्षा की तैयारी का दबाव बना रहे थे।
लेकिन अक्षत की इच्छा अलग थी। वह बड़ा बिजनेस करना चाहता था। इसी बात को लेकर पिता-पुत्र के बीच अक्सर विवाद होता था।
छह पन्नों का पत्र: “बड़ा आदमी बनकर ही लौटूंगा”
कुछ समय पहले अक्षत घर छोड़कर चला गया था। जाने से पहले वह पिता के नाम छह पन्नों का पत्र छोड़ गया, जिसमें लिखा था कि “सिर्फ पैथोलॉजी चलाकर बड़ा आदमी नहीं बना जा सकता। मेरी बात आपने नहीं मानी, इसलिए मैं घर छोड़ रहा हूं। अब बड़ा आदमी बनने के बाद ही लौटूंगा।”
परिवार के प्रयासों के बाद वह वापस घर लौटा, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ।
बहन के सामने हुई वारदात
20 फरवरी की सुबह पिता-पुत्र के बीच फिर बहस हुई। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान अक्षत ने पिता की रायफल से गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर बहन कृति कमरे में पहुंची और पिता को गिरते देखा।
डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के मुताबिक, आरोपी ने बहन को धमकाया कि यदि उसने किसी को बताया तो उसे भी जान से मार देगा। वह कई घंटों तक बहन को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहा था।
‘नीले ड्रम’ में छिपाया शव
हत्या के बाद अक्षत ने शव को नीचे के कमरे में ले जाकर टुकड़े किए। कुछ हिस्से कार में रखकर सदरैना क्षेत्र में फेंक दिए, जबकि बाकी टुकड़े कमरे में रखे नीले ड्रम में डाल दिए। वह उन्हें भी ठिकाने लगाने की फिराक में था।
पड़ोसियों के पूछने पर वह कहता रहा कि उसके पिता दिल्ली गए हैं।
दादा का दर्द: “मेरी बुढ़ापे की लाठी टूट गई”
मृतक के पिता सुरेंद्र पाल सिंह राजावत ने रोते हुए कहा, “मेरी बुढ़ापे की लाठी टूट गई। बेटा तो चला ही गया, पोता भी अपराधी बन गया, उसकी जिंदगी भी तबाह हो गई।”
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पारिवारिक तनाव और करियर को लेकर दबाव को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है।
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या सपनों और अपेक्षाओं का दबाव कभी-कभी रिश्तों को इतना भारी बना देता है कि वे टूट जाते हैं।
