
मुंबई: बॉलीवुड की ‘सौंदर्य देवी’ मधुबाला ने अपने समय की अंतरराष्ट्रीय फिल्मी दुनिया को भी आकर्षित किया। 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में जन्मी मधुबाला, जिनका असली नाम मुमताज जहां देहलवी था, बचपन से ही अपने चेहरे की मासूमियत और अभिनय से सबका ध्यान खींचती रहीं।
छोटी उम्र में बड़े कदम
मधुबाला ने 9 साल की उम्र में फिल्म ‘बसंत’ से बाल कलाकार के रूप में अभिनय शुरू किया और महज 12 साल की उम्र में ड्राइविंग सीखकर उस समय की सामाजिक धारणाओं को चुनौती दी। उनका यह आत्मविश्वास उनके करियर और व्यक्तित्व की पहचान बन गया।
हॉलीवुड का ऑफर और ठुकराव
ऑस्कर विनर डायरेक्टर फ्रैंक कैप्रा ने उन्हें अमेरिका में बड़े बजट की फिल्मों का ऑफर भेजा। यह कदम हॉलीवुड में उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिला सकता था, लेकिन मधुबाला ने इसे ठुकरा दिया। उनका मानना था कि सफलता सिर्फ ग्लैमर या पैसा नहीं, बल्कि अपने मूल्यों और फैसलों में भी होती है।
बॉलीवुड में 70 फिल्मों का करियर
अपने 22 साल के करियर में मधुबाला ने लगभग 70 फिल्मों में काम किया। 1947 में ‘नील कमल’ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। 1950 के दशक में ‘महल’, ‘फागुन’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘काला पानी’ और ‘चलती का नाम गाड़ी’ जैसी सफल फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार कर दिया।
‘मुगल-ए-आजम’ और व्यक्तिगत जीवन
मधुबाला की सबसे बड़ी पहचान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ रही। इस दौरान गंभीर दिल की बीमारी के बावजूद उन्होंने शूटिंग पूरी की। उनके व्यक्तिगत जीवन में दिलीप कुमार और किशोर कुमार के साथ रिश्ते चर्चित रहे।
दिल की बीमारी और निधन
1960 के दशक में मधुबाला का स्वास्थ्य बिगड़ा और पता चला कि उनके दिल में छेद है। लंदन के डॉक्टरों ने सर्जरी से मना किया। 23 फरवरी 1969 को 36 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनकी अदाकारी और योगदान आज भी याद किए जाते हैं।
