
मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर और सुपरस्टार सलमान खान के पिता सलीम खान इन दिनों लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती हैं। ‘शोले’, ‘दीवार’, ‘जंजीर’, ‘डॉन’ और ‘हाथी मेरे साथी’ जैसी हिट फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने वाले सलीम खान ने फिल्मों पर फतवा जारी करने वाले संगठनों को कभी करारा जवाब दिया था।
रमज़ान का महीना जारी है और इसके बाद आने वाली ईद पर बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की नजरें रहती हैं। ईद के मौके पर रिलीज होने वाली फिल्में दर्शकों और बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करती हैं, खासकर सलमान खान की फिल्में। इस अवसर पर सलीम खान के पुराने बयानों की यादें भी ताजा हो जाती हैं।
ईद पर फिल्म रिलीज़ का मकसद
सलीम खान ने साफ किया था कि ईद पर फिल्मों की रिलीज़ का उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को आहत करना नहीं, बल्कि त्योहार के उत्सव और पारिवारिक माहौल का हिस्सा बनना है। उनका कहना था कि ईद का समय परिवार के साथ बिताने का अवसर होता है और सिनेमा एक मनोरंजन का जरिया बन जाता है।
हर मुसलमान पर फतवा?
फिल्मों पर फतवा जारी करने वाले संगठनों पर कटाक्ष करते हुए सलीम खान ने कहा था, “फतवा सिर्फ फिल्म बनाने वालों पर ही क्यों, देखने वालों पर क्यों नहीं? अगर हर मुसलमान के फिल्म देखने पर बैन लगा दिया जाए, तो हमारा काम खुद-ब-खुद बंद हो जाएगा। फिल्म के लिए ईद का वीक बहुत जरूरी और कमाल का होता है। इससे साफ पता चलता है कि मुसलमान सबसे ज्यादा फिल्म देखता है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस्लाम धर्म इंसानियत और मोहब्बत का पाठ पढ़ाता है, बदले की भावना का नहीं।
हर धर्म का सम्मान
सलीम खान और सलमान खान हमेशा से अपने घर में हर धर्म के सम्मान पर जोर देते आए हैं। सलमान की मां हिंदू धर्म से हैं और परिवार हर साल गणेश चतुर्थी का आयोजन करता है। बप्पा की विदाई पर ढोल की थाप पर नृत्य करना उनके पारिवारिक उत्सव का हिस्सा है।
सलीम खान की यह बेबाक टिप्पणी न केवल फिल्म इंडस्ट्री के लिए बल्कि दर्शकों के लिए भी एक संदेश है कि सिनेमा का उद्देश्य मनोरंजन और त्योहारों की खुशियों में शामिल होना है।
