
जकार्ता: इंडोनेशिया ने अपनी नेवी के लिए इटली से ग्यूसेप गैरीबाल्डी एयरक्राफ्ट कैरियर खरीदने का ऐलान किया है। इस डीकमीशन्ड वेसल ने 1985 से 2024 तक इटली की नेवी में काम किया और अक्टूबर 2026 तक इसे इंडोनेशियाई नेवी को सौंपे जाने की उम्मीद है। इस कदम से इंडोनेशिया साउथ-ईस्ट एशिया का दूसरा और पूरे एशिया का पांचवां देश बनेगा, जिसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर होगा।
रणनीतिक और मानवीय दोनों रोल
विशेषज्ञों का कहना है कि यह जहाज कई तरह के कॉम्बैट और नॉन-कॉम्बैट ऑपरेशन में सक्षम है। इंडोनेशियाई नेवी इसे स्ट्रैटेजिक ताकत बढ़ाने, इंटेलिजेंस और सर्विलांस, और मानवीय राहत व डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
नेवी चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल मोहम्मद अली ने बताया कि कैरियर आपदा प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 13,000 किमी है, जिससे इंडोनेशिया के पूरे क्षेत्र में मदद पहुंचाना संभव होगा।
पड़ोसी देशों की चिंता
हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे महज मानवीय टूल नहीं मानते। रबदान सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंस्टीट्यूट के रिसर्चर अब्दुल रहमान याकूब का कहना है कि एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती दक्षिण-पूर्व एशिया में पड़ोसी देशों और बाहरी ताकतों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसके चलते क्षेत्रीय देशों में सैन्य संतुलन और पावर डायनामिक्स को लेकर नई चर्चाएँ हो सकती हैं।
खर्च और तकनीकी चुनौतियां
विशेषज्ञों के अनुसार, इस जहाज को चलाने का सालाना खर्च 50 से 80 मिलियन डॉलर के बीच होगा। इसके लिए क्रू मेंबर्स की लंबी ट्रेनिंग भी आवश्यक है। याकूब ने कहा कि ग्यूसेप गैरीबाल्डी 40 साल पुराना है और मॉडर्न एयरक्राफ्ट कैरियर की तुलना में इसकी क्षमताएँ सीमित हैं। इसलिए इस खरीद से क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा।
निष्कर्ष
इंडोनेशिया का यह कदम उसकी नेवी को सशक्त बनाने और रणनीतिक क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि पड़ोसी देशों और बाहरी ताकतों की नजर इस दिशा में लगी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जबकि जहाज की तकनीकी सीमाएँ हैं, फिर भी इसे केवल मानवीय मिशन तक सीमित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
