Monday, February 23

यूरोप के सबसे बड़े फाइटर जेट प्रोग्राम में भारत की एंट्री का मौका, जर्मनी बाहर

पेरिस: भारत ने छठी पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल होने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नई दिल्ली की नजर यूरोप के सबसे बड़े फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) प्रोजेक्ट पर है, जिसे फ्रांस, जर्मनी और स्पेन ने 2017 में 100 अरब यूरो की महत्वाकांक्षी लागत के साथ शुरू किया था। इस प्रोग्राम का उद्देश्य एक अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट तैयार करना था, जो न्यूक्लियर हथियार ले जा सके और एयरक्राफ्ट कैरियर से लॉन्च किया जा सके।

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जर्मनी ने प्रोजेक्ट से पीछे हटे हाथ

हाल ही में जर्मनी ने इस प्रोग्राम से खुद को अलग कर लिया। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि न्यूक्लियर हथियार ले जाने की जरूरत उनके लिए प्रासंगिक नहीं है। जर्मनी की नीति परमाणु हथियारों के खिलाफ है और उसने अपने परमाणु पावर प्लांट भी बंद कर दिए हैं। जर्मनी के पीछे हटने से FCAS प्रोजेक्ट के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं, लेकिन भारत के लिए यह सुनहरा मौका बन गया है।

फ्रांस-भारत साझेदारी की संभावना

रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन और स्पेन की इंद्रा सिस्टेमास FCAS प्रोजेक्ट में शामिल हैं। एयरबस के CEO गिलौम फाउरी ने सुझाव दिया कि फ्रांस और जर्मनी अलग-अलग जेट बनाएं, लेकिन उन्हें शेयर्ड कॉम्बैट क्लाउड और ड्रोन सिस्टम से जोड़ें। इस स्थिति में भारत फ्रांस के साथ मिलकर प्रोजेक्ट में शामिल हो सकता है और छठी पीढ़ी की तकनीक तक पहुंच हासिल कर सकता है।

भारत की रणनीति

भारत ने फ्रांस को साफ-साफ संकेत दे दिया है कि अगर जर्मनी के साथ साझेदारी नहीं बनती है तो FCAS प्रोजेक्ट में शामिल होने पर विचार किया जाएगा। भारत पहले ही अपने पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का निर्माण कर रहा है। FCAS में शामिल होने से भारत की छठी पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम में तकनीकी बढ़त संभव होगी और उसकी वैश्विक रक्षा क्षमताओं में मजबूती आएगी।

निष्कर्ष

जर्मनी के प्रोजेक्ट से बाहर होने के बाद, यूरोप के सबसे बड़े फाइटर जेट प्रोग्राम में भारत की एंट्री न केवल तकनीकी लाभ दे सकती है बल्कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग में नई भूमिका भी तय कर सकती है।

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