
नई दिल्ली: देश में कर्ज (Loan) डिफॉल्ट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर युवा पीढ़ी, यानी Gen Z, भी इस कर्ज के जाल में फंसती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कई युवाओं ने अपनी मासिक सैलरी से 100 गुना तक ज्यादा लोन लिया हुआ है और इसे चुकाने में असफल हो रहे हैं।
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हर महीने सैकड़ों युवा, जो 25-35 साल की उम्र के हैं, कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। साल 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए जूमर्स (Zoomers) पहली ऐसी पीढ़ी हैं जिन्होंने इतना बड़ा कर्ज जमा किया है। उदाहरण के तौर पर, कई युवा ₹30,000–₹40,000 की मासिक सैलरी पर ₹30–40 लाख तक का कर्ज ले चुके हैं।
क्यों बढ़ रहा कर्ज का सिलसिला?
ज्यादातर युवा लोन का इस्तेमाल जरूरी सामान, जीवनशैली सुधार, गैजेट्स, यात्रा या करियर को बढ़ाने के लिए करते हैं। छोटे और असुरक्षित लोन आसानी से मोबाइल ऐप्स से मिल जाते हैं, जिनमें कोई गारंटी नहीं चाहिए। धीरे-धीरे ये छोटे लोन बड़े कर्ज में बदल जाते हैं।
जब मासिक आय बढ़ती हुई ईएमआई (EMI) को कवर नहीं कर पाती, तो स्थिति और बिगड़ जाती है। मौजूदा लोन या बकाया किस्त चुकाने के लिए और अधिक लोन लिया जाता है।
Gen Z की स्थिति
CIBIL की रिपोर्ट के अनुसार, नए क्रेडिट लेने वाले ग्राहकों का 41% हिस्सा Gen Z का है। वहीं, CRIF High Mark और UFF के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 तक एनबीएफसी फिनटेक से लोन लेने वालों में 65% से अधिक लोग 26-35 साल की उम्र के हैं।
हालांकि यह पीढ़ी उपभोग को बढ़ावा दे रही है, लेकिन छोटे लोन (₹50,000 से कम) चुकाने में पिछड़ रही है। CRIF-UFF के अनुसार, इनमें से लगभग 26% लोन 90 दिन से अधिक समय से डिफॉल्ट हैं।
चेक बाउंस के मामले
देश में चेक बाउंस के मामले भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को ₹9 करोड़ के चेक बाउंस मामले में जेल जाना पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक, देश में 43 लाख से ज्यादा चेक बाउंस के मामले लंबित हैं। इसके बावजूद लोगों में सजा का डर कम दिख रहा है।
बढ़ रहे बैंकों के NPA
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क्रेडिट कार्ड का बकाया 28.4% बढ़कर ₹6,742 करोड़ तक पहुंचा।
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लगभग 1,629 बड़े उधारकर्ताओं ने ₹1.62 लाख करोड़ का लोन डिफॉल्ट किया।
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बैंकों का बैड लोन (NPA) 3.7% बढ़ा, माइक्रो लोन सेक्टर में 4.8%।
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44% क्रेडिट कार्ड धारक डिफॉल्ट कर रहे हैं।
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क्रेडिट कार्ड का NPA 2.3%।
महाराष्ट्र टॉप पर
देश में 33 लाख से ज्यादा चेक सिर्फ 5 राज्यों में बाउंस हुए हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले लंबित हैं (5.6 लाख चेक), गुजरात दूसरे स्थान पर (4.8 लाख चेक)। पुणे में अकेले 780 चेक बाउंस हुए, जिनकी राशि ₹30.15 करोड़ है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 2025-26 के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें व्हाट्सएप नोटिस और 20% अंतरिम भुगतान जैसे नियमों पर जोर दिया गया है, ताकि चेक बाउंस मामलों का निपटारा तेजी से हो सके।
