
नई दिल्ली: हरियाणा के सोनीपत जिले के जंती खुर्द गांव के रहने वाले दीपक राज तुषीर ने अपने करियर और जुनून की कहानी से सबको हैरान कर दिया है। बीई (इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) और एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद दीपक ने 10 साल तक विप्रो (Wipro) में काम किया। लेकिन अपने गांव और खेती के प्रति लगाव के चलते, उन्होंने साल 2012 में नौकरी छोड़कर डेयरी फार्मिंग की राह अपनाई।
दीपक ने दो साथी कंप्यूटर इंजीनियरों और न्यूजीलैंड के दो किसानों के साथ मिलकर ‘बिंसर फार्म्स’ की नींव रखी। उनका मकसद था अपने गांव की तरक्की में योगदान देना और लोगों को उच्च गुणवत्ता वाला दूध उपलब्ध कराना।
शुरुआत एक बछिया से
बिंसर फार्म्स की शुरुआत सिर्फ एक बछिया से हुई। फार्म में होस्टीन फ्रीजियन (HF), जर्सी और देसी भारतीय नस्लों की गायों को शामिल किया गया, जो अधिक दूध देती हैं और मशीन से दुहन के लिए उपयुक्त हैं। दीपक ने गायों की सेहत और प्रजनन के लिए रिसर्च की और स्थापित ब्रीडिंग स्टैंडर्ड्स का पालन किया।
मुश्किलों का सामना
शुरुआत में फार्म ने कई चुनौतियां देखीं। 50 गायों में से 15 बीमारियों के कारण मर गईं। लेकिन दीपक ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी आईटी नॉलेज का उपयोग कर गायों का वजन मापा और लैब टेस्ट करवाए। इससे उन्हें पता चला कि स्वस्थ गायों का वजन अच्छा होता है, जबकि कम वजन वाली गायें बीमार होती हैं।
करोड़ों का टर्नओवर
दीपक ने पशुओं के परीक्षण और प्रबंधन के लिए सख्त नियम बनाए और अच्छी गुणवत्ता वाले सीमेन का उपयोग किया। इससे स्वस्थ और अधिक दूध देने वाले पशु फार्म में शामिल हुए।
स्थानीय डेयरी व्यवसायों में बढ़त पाते हुए, दीपक ने अपने दूध को बोतलों में पैक करना शुरू किया। शुरुआत में केवल 4 से 10 लीटर दूध बिकता था, लेकिन धीरे-धीरे यह बढ़कर 7,000 से 8,000 लीटर प्रति दिन तक पहुंच गया। 2023 में बिंसर फार्म्स ने 23 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया, जिसमें 5-6% का नेट मार्जिन रहा।
दीपक राज तुषीर की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि अगर जुनून और मेहनत साथ हों, तो क्षेत्र और परिस्थितियों की परवाह किए बिना सफलता हासिल की जा सकती है।
