
अजमेर। आस्था और भाईचारे की नगरी अजमेर इन दिनों सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। नगर निगम प्रशासन के हाथ पर हाथ धरे बैठने के बावजूद, रविवार को दरगाह बाजार में लुधियाना से आए 40 जियारतियों ने सेवा का ऐसा जज्बा दिखाया कि हर अजमेरवासी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
जायरीन ने किया दरगाह बाजार साफ
लुधियाना से आए इस दल में बड़े व्यवसायी, सरकारी कर्मचारी और दिव्यांग सेवादार भी शामिल थे। दरगाह की ओर बढ़ते समय मुख्य मार्ग पर फैली गंदगी और कचरे के अंबार को देखकर दल के सदस्यों का मन व्यथित हो गया।
डॉ. अमरजीत सिंह, आयुर्वेद चिकित्सक, ने बताया:
“हम बाबा के दरबार में हाजिरी देने आए थे, लेकिन रास्ते की गंदगी देख मन बहुत दुखी हुआ। हमसे यह देखा नहीं गया। जियारत से पहले हमने तय किया कि बाबा के दरबार का रास्ता साफ करेंगे।”
साधनों के बिना जुटी सेवा
इन सेवादारों के पास सफाई के साधन नहीं थे। उन्होंने प्रशासन पर कोई टिप्पणी नहीं की और न ही शिकायत की। आसपास से मिली पुरानी झाड़ू, गत्ते और बोरे लेकर उन्होंने मोर्चा संभाला।
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कचरा इकट्ठा कर बोरों में भरा गया
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सड़क किनारे व्यवस्थित किया गया
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मार्ग को चलने लायक बनाया गया
इस दौरान एक दिव्यांग सेवादार का उत्साह देखने लायक था, जिसने शारीरिक अक्षमता के बावजूद पूरे समर्पण के साथ सफाई की।
अजमेरवासियों के लिए बड़ी नजीर
पंजाब से आए इन अतिथियों ने संदेश दिया कि शहर सिर्फ प्रशासन का नहीं, बल्कि हर उस शख्स का है जो वहां रहता या आता है। उनकी इस पहल को देख स्थानीय लोग भी ठिठक गए।
नगर निगम की विफलता और मेहमानों के सेवा भाव ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया: अगर बाहर से आने वाले लोग शहर को साफ कर सकते हैं, तो क्या हम अपने शहर की जिम्मेदारी नहीं निभा सकते?
