
रांची। रांची रिम्स में एक पिता ने अपने 6 साल के मासूम बेटे की मौत के बाद ऐसा फैसला लिया, जिसने दो लोगों की दुनिया बदल दी। सुजीत मुंडा के बेटे की दोनों आंखें दान की गईं, जिससे दो परिवारों को नई रोशनी मिली।
ब्रेन ट्यूमर से हार गया मासूम
सुजीत मुंडा का बेटा ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। रांची रिम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग ने उसकी जान बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मासूम की मौत की खबर ने परिवार को गमगीन कर दिया।
पिता ने दिखाई अद्भुत इंसानियत
अपने कलेजे के टुकड़े को खोने के बावजूद सुजीत मुंडा ने हौसला नहीं खोया। उन्होंने कहा:
“मेरा बेटा इस खूबसूरत दुनिया को देखना और जीना चाहता था। अब वह नहीं है, लेकिन अगर उसकी आंखों से कोई और इस दुनिया को देख सके, तो यही उसकी सच्ची विदाई होगी।”
रिम्स आई बैंक की टीम ने तीन घंटे के भीतर नेत्रदान की सारी प्रक्रिया पूरी कर दी। इस तरह यह मासूम बच्चा रिम्स का सबसे कम उम्र का नेत्रदाता बन गया।
दो लोगों को मिला ‘रोशनी का उपहार’
रिम्स नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार के अनुसार, मासूम की दोनों आंखों का सफल प्रत्यारोपण किया गया।
आलोक कुमार, पलामू निवासी, जिन्होंने 6 साल पहले आंखों की रोशनी खो दी थी।
बसंती महतो, पूर्वी सिंहभूम, 6 महीनों से दृष्टिहीन।
दोनों मरीजों को यह प्रत्यारोपण पूरी तरह निःशुल्क किया गया।
इंसानियत की सच्ची मिसाल
जाते-जाते इस 6 साल के मासूम ने दुनिया को सिखा दिया कि जीवन का असली अर्थ दूसरों की राह रोशन करना है। सुजीत मुंडा के इस साहसिक निर्णय ने साबित कर दिया कि त्याग और मानवता की चमक किसी भी दुख को पार कर सकती है।
यह कहानी न केवल रांची रिम्स के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा और मानवता का प्रतीक बन गई है।
