Monday, February 23

बिहार के वरिष्ठ आईपीएस सुनील नायक की गिरफ्तारी को लेकर पटना में हलचल, आंध्र पुलिस की दबिश

पटना, 23 फरवरी 2026। बिहार पुलिस महकमे में सोमवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब Andhra Pradesh पुलिस की एक विशेष टीम बिहार कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी एम. सुनील नायक की गिरफ्तारी के लिए पटना पहुंची। वर्तमान में वे बिहार अग्निशमन सेवा में आईजी (फायर ब्रिगेड) के पद पर तैनात हैं।

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आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम ने शास्त्री नगर थाना क्षेत्र स्थित उनके सरकारी आवास पर छापेमारी की और कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की। सूत्रों के अनुसार, उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर आंध्र प्रदेश ले जाने की तैयारी की जा रही है।


2021 का मामला, हिरासत में मारपीट का आरोप

पूरा मामला वर्ष 2021 से जुड़ा है, जब सुनील नायक आंध्र प्रदेश में सीआईडी में प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। आरोप है कि उनके निर्देश पर नरसापुरम के तत्कालीन सांसद K. Raghurama Krishnam Raju को गिरफ्तार किया गया था।

पूर्व सांसद ने आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और हिरासत में गंभीर मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि इस हमले से उनकी जान को खतरा उत्पन्न हुआ। मामले में न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराएं

आईपीएस अधिकारी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है। शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ी और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रही।

सूत्र बताते हैं कि प्रारंभिक चरण में उन्हें राहत मिली थी, लेकिन हाल ही में उनकी जमानत रद्द कर दी गई। जमानत रद्द होते ही आंध्र प्रदेश पुलिस सक्रिय हुई और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पटना पहुंच गई।

पटना आवास पर बढ़ी सुरक्षा, कानूनी औपचारिकताएं जारी

आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम स्थानीय पुलिस की उपस्थिति में दस्तावेजों की जांच कर रही है। आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने पर उन्हें सड़क या हवाई मार्ग से आंध्र प्रदेश ले जाया जाएगा, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के खिलाफ इस स्तर की कार्रवाई से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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