Monday, February 23

भारत में 5 दिन, अब अमेरिका की ओर नजर: टैरिफ पर ट्रंप को क्या संदेश देने जा रहे हैं लूला?

नई दिल्ली। भारत की पांच दिवसीय यात्रा संपन्न करने के बाद ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva अब अमेरिका दौरे की तैयारी में हैं। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगले महीने उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से हो सकती है।

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भारत में दिए गए उनके बयानों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि लूला ने बिना नाम लिए ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक हस्तक्षेपवाद पर सीधा संदेश देने की कोशिश की है।

भारत-ब्राजील के बीच नई रणनीतिक साझेदारी

भारत और ब्राजील के बीच माइनिंग और मिनरल्स सेक्टर में सहयोग को लेकर अहम द्विपक्षीय संधि हुई है। क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक होड़ के बीच यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्राजील लौह अयस्क का दुनिया का प्रमुख उत्पादक है और उसके पास ऐसे खनिजों का विशाल भंडार है जो स्टील उत्पादन के लिए आवश्यक हैं। यह समझौता भारत के स्टील और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकता है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से अधिक तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फिलहाल यह आंकड़ा लगभग 15 अरब डॉलर के आसपास है।

टेक्नोलॉजी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।

‘बराबरी’ पर आधारित संबंध

लूला ने भारत-ब्राजील संबंधों को ‘बराबरी पर आधारित साझेदारी’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश के साथ बातचीत करते समय किसी उपनिवेशवादी मानसिकता का सवाल ही नहीं उठता।

उनका यह बयान वैश्विक शक्ति संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार यह परोक्ष रूप से पश्चिमी देशों की वर्चस्ववादी नीतियों पर टिप्पणी है।

टैरिफ पर ट्रंप को सीधा संदेश?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत और ब्राजील दोनों प्रभावित रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल में कई देशों पर 50% तक टैरिफ लगाने की नीति अपनाई, जिससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी।

भारत यात्रा के दौरान लूला ने कहा,

“दुनिया और ज्यादा उथल-पुथल नहीं चाहती, उसे शांति और स्थिरता चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ के मामले में किसी भी देश के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और दुनिया को ‘नए शीत युद्ध’ की दिशा में नहीं ले जाया जाना चाहिए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान ट्रंप के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब दबाव की राजनीति को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।

भारत से अमेरिका तक: बदले वैश्विक समीकरण

भारत में रणनीतिक समझौते और अमेरिका में प्रस्तावित बैठक, दोनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि ब्राजील संतुलित कूटनीति की राह पर है।

एक ओर वह भारत जैसे उभरते साझेदारों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ संवाद बनाए रखना चाहता है।

लूला की आगामी अमेरिका यात्रा इस बात की परीक्षा होगी कि क्या वैश्विक व्यापार में टकराव की जगह सहयोग ले सकता है, या फिर टैरिफ की राजनीति आने वाले समय में और तीखी होगी।

स्पष्ट है कि नई दिल्ली से दिया गया संदेश वॉशिंगटन तक पहुंचेगा—और अब सबकी नजर इस पर है कि ट्रंप उसका जवाब किस अंदाज में देते हैं।

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