
नई दिल्ली। देश में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और हालिया अध्ययन ने स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। हेल्थ-साउथईस्ट एशिया क्षेत्र में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 40 प्रतिशत वयस्क मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) से प्रभावित हो सकते हैं। इस बीमारी को पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता था।
रिपोर्ट इसी महीने प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Regional Health – Southeast Asia में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में देश के 27 शहरों के प्रतिभागियों का विश्लेषण किया गया।
बिना लक्षण के बढ़ती है बीमारी
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है। जब तक मरीज को इसका पता चलता है, तब तक लिवर को गंभीर क्षति हो चुकी होती है।
अध्ययन के अनुसार:
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38.9% प्रतिभागियों में फैटी लिवर के संकेत पाए गए।
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6.3% लोगों में लिवर फाइब्रोसिस (लिवर में शुरुआती स्थायी क्षति) के लक्षण मिले।
फाइब्रोसिस आगे चलकर सिरोसिस और लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।
दिल्ली के आंकड़े और भी चिंताजनक
राजधानी दिल्ली में स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी अधिक गंभीर पाई गई।
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41.3% लोगों में फैटी लिवर की पुष्टि हुई।
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4.5% आबादी में फाइब्रोसिस के संकेत मिले।
अन्य शहरों में स्थिति और भी गंभीर रही।
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भोपाल में 51.8%
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श्रीनगर में 54.4% लोगों में फैटी लिवर की समस्या दर्ज की गई।
केवल शराब नहीं, मेटाबॉलिक कारण भी जिम्मेदार
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि लिवर डिजीज केवल शराब के सेवन से नहीं होती। इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
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मोटापा
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डायबिटीज
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हाई ब्लड प्रेशर
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मेटाबॉलिक गड़बड़ियां
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शरीर में जमा होने वाली विसरल फैट
चौंकाने वाली बात यह है कि सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले कई लोगों में भी यह बीमारी पाई गई। डॉक्टरों के अनुसार बाहरी रूप से पतले दिखने वाले व्यक्ति के शरीर के अंदर जमा विसरल फैट मेटाबॉलिक जोखिम बढ़ा सकता है।
क्या है खतरा?
यदि समय रहते जांच और इलाज न किया जाए तो:
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लिवर फाइब्रोसिस
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सिरोसिस
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लिवर फेल्योर
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लिवर कैंसर
जैसी गंभीर स्थितियां विकसित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।
विशेषकर शहरी जीवनशैली, जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता को इस बढ़ती समस्या का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
यह अध्ययन संकेत देता है कि भारत में फैटी लिवर अब एक उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, जिसके प्रति जागरूकता और समय पर रोकथाम बेहद जरूरी है।
