
नई दिल्ली। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार आठ संदिग्धों के मामले में पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल के तार बांग्लादेश में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा के सेल और उसके कथित हैंडलर शब्बीर अहमद लोन उर्फ ‘राजा कश्मीरी’ से जुड़े हैं।
2007 में पहली गिरफ्तारी
साल 2007 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि श्रीनगर निवासी शब्बीर अहमद लोन को राजधानी में फिदायीन हमले के लिए भर्ती किया गया है। जुलाई 2007 में उसे चांदनी चौक से गिरफ्तार किया गया था।
उसके ठिकाने से ग्रेनेड, AK-47, भारी मात्रा में गोला-बारूद, एक लाख रुपये नकद और 280 डॉलर बरामद हुए थे। जांच में हवाला के जरिए फंडिंग के संकेत भी मिले थे।
शब्बीर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था। 2019 में उसे जमानत मिली और उसके बाद वह भूमिगत हो गया।
2026 में फिर रडार पर
अब 2026 में वह एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। अधिकारियों के मुताबिक, शब्बीर बांग्लादेश में रहकर लश्कर-ए-तैयबा के लिए मॉड्यूल तैयार कर रहा था।
हाल ही में कोलकाता और तिरुप्पुर में छापेमारी के दौरान आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इनमें सात बांग्लादेशी नागरिक बताए जा रहे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए थे।
बरामदगी और साजिश
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, 25 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 5 पीओएस मशीनें और बांग्लादेशी पासपोर्ट जब्त किए गए हैं।
संदिग्धों के फोन में दिल्ली के चांदनी चौक स्थित एक मंदिर की तस्वीरें मिली हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये लोग महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी कर रहे थे।
PoK में ट्रेनिंग, ढाका से ऑपरेशन
जांच में सामने आया है कि शब्बीर ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद कैंप में 21 दिन की बेसिक और तीन महीने की विशेष प्रशिक्षण ली थी। इसमें AK राइफल, रॉकेट लॉन्चर और IED बनाने की ट्रेनिंग शामिल थी।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, उसने कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार की भी ट्रेनिंग ली और बाद में बांग्लादेश में नेटवर्क तैयार किया।
बताया जा रहा है कि शब्बीर के तार लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी से भी जुड़े रहे हैं।
‘कम चर्चित’ रास्ते की रणनीति
जांच अधिकारियों का कहना है कि शब्बीर की रणनीति बांग्लादेशी युवाओं को भारत में भेजकर मॉड्यूल तैयार करने की थी, ताकि वे कश्मीरी या पाकिस्तानी आतंकियों की तरह तुरंत संदेह के घेरे में न आएं।
गारमेंट उद्योग में काम कर रहे कुछ अवैध प्रवासियों को पैसे और बेहतर जीवन का लालच देकर भर्ती किए जाने के भी संकेत मिले हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाब
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस आतंकी सेल के भंडाफोड़ को बड़ी सफलता मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे बांग्लादेश के रास्ते भारत में सक्रिय किए जा रहे नए मॉड्यूल की साजिश नाकाम हुई है।
फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क की वित्तीय व डिजिटल कड़ियों की जांच की जा रही है।
यह खुलासा एक बार फिर संकेत देता है कि सीमापार आतंक नेटवर्क अब पारंपरिक रास्तों के साथ-साथ नए मार्गों और पहचान के जरिए भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई है।
