Monday, May 25

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रावी पर नियंत्रण, चिनाब की सफाई तेज: क्या पाकिस्तान के लिए बढ़ने वाला है जल संकट?

नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा दिया है। पंजाब–जम्मू-कश्मीर सीमा पर बन रही शाहपुर कंडी बांध परियोजना मार्च 2026 के अंत तक पूरी होने की कगार पर है। इसके साथ ही चिनाब नदी पर जमी गाद हटाने का काम भी तेज कर दिया गया है। इन दोनों कदमों को क्षेत्रीय जल-राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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1960 की संधि और भारत का अधिकार

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत पूर्वी नदियां—रावी, ब्यास और सतलुज—का उपयोग भारत को सौंपा गया था, जबकि पश्चिमी नदियां—सिंधु, झेलम और चिनाब—पाकिस्तान के हिस्से में गईं।

संधि के अनुसार भारत को रावी के जल का पूर्ण उपयोग करने का अधिकार है। बावजूद इसके, अधोसंरचना की कमी के कारण बाढ़ के समय रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान की ओर बह जाता था। शाहपुर कंडी परियोजना इस स्थिति को बदलने की दिशा में अहम कदम है।

क्या बदलेगा शाहपुर कंडी बांध से?

पठानकोट जिले में स्थित यह परियोजना करीब 11,500 क्यूसेक्स पानी को नियंत्रित करने की क्षमता रखती है। 3,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इस योजना से:

  • पंजाब और जम्मू-कश्मीर के कठुआ व सांबा जैसे क्षेत्रों को सिंचाई लाभ मिलेगा

  • लगभग 32,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई पुनः शुरू हो सकेगी

  • 206 मेगावॉट का जलविद्युत उत्पादन संभव होगा

  • रावी के अतिरिक्त पानी का आंतरिक उपयोग सुनिश्चित होगा

सूत्रों के अनुसार, परियोजना के पूर्ण होने के बाद इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा सकता है।

चिनाब पर भी बढ़ी गतिविधि

संधि के निलंबन के बाद पहली बार चिनाब नदी में गाद हटाने की प्रक्रिया तेज हुई है। जम्मू-कश्मीर के रियासी स्थित सलाल जलविद्युत परियोजना में जलाशय की क्षमता घटकर 9.91 मिलियन घन मीटर रह गई थी, जिसे हालिया सफाई के बाद 14 एमसीएम तक बढ़ाया गया है।

करीब 1.7 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने की योजना है, साथ ही स्थायी रूप से बंद छह अंडर-स्लुइस गेटों को फिर से खोलने के लिए निविदाएं जारी की गई हैं। इससे बिजली उत्पादन दक्षता में वृद्धि की उम्मीद है।

पाकिस्तान पर संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान को हर साल लगभग 80 अरब क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होती है, जिसमें से 90% कृषि क्षेत्र में उपयोग होता है। रावी से 20–30 लाख एकड़ फीट पानी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की नहरों को मिलता रहा है।

यदि अतिरिक्त जल प्रवाह रुकता है, तो खरीफ फसलों और लाहौर जैसे शहरों की जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, भारत का कहना है कि वह अपने संधि अधिकारों के भीतर ही कदम उठा रहा है।

बढ़ता जल-राजनीतिक तनाव

पहलगाम हमले (2025) के बाद जल परियोजनाओं को गति देने का निर्णय लिया गया था। भारत सीमापार आतंकवाद को देखते हुए जल सहयोग को सख्त दृष्टिकोण से देख रहा है। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

जलवायु परिवर्तन और हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने से सिंधु बेसिन पर पहले से दबाव है। ऐसे में पानी अब सिर्फ प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि रणनीतिक कारक के रूप में उभर रहा है।

निष्कर्ष

शाहपुर कंडी बांध और चिनाब की सफाई परियोजनाएं भारत के जल संसाधनों के पूर्ण उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। जहां भारत इसे विकास और संसाधन प्रबंधन का विषय बता रहा है, वहीं पाकिस्तान इसे संभावित जल संकट के रूप में देख रहा है।

आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं का असर न केवल कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में दिखेगा, बल्कि दक्षिण एशिया की जल कूटनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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