
ग्रेटर नोएडा, 23 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश के Greater Noida वेस्ट स्थित Amrapali Centurian Park Low Rise AOA ने सोसायटी परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए सख्त ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू कर दी है। जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले के तहत अब पालतू कुत्तों द्वारा कॉमन एरिया में गंदगी करने पर उनके मालिकों से 1000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
सोसायटी प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि गंदगी होने की स्थिति में संबंधित मालिक को तुरंत सफाई भी सुनिश्चित करनी होगी।
600 परिवारों वाली सोसायटी में कड़े प्रावधान
लो राइज एरिया में लगभग 600 परिवार निवास करते हैं। एओए अध्यक्ष राजीव कुमार और लीगल एडवाइजर अमित गुप्ता के अनुसार, सोसायटी परिसर में पहले से लगे 190 सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाकर 300 की जाएगी, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
प्रबंधन का कहना है कि निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से नियमों के पालन में पारदर्शिता आएगी और विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहेंगे।
केवल डॉग ओनर्स ही नहीं, अन्य उल्लंघनों पर भी सख्ती
सोसायटी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल पालतू कुत्तों तक सीमित नहीं है।
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पान-गुटखा खाकर सार्वजनिक स्थान पर थूकने
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खुले में शौच करने
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सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने
जैसी गतिविधियों पर भी 1000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
तीन बार गलती पर ब्लैकलिस्ट
एओए के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति एक ही नियम का उल्लंघन तीन बार करता है, तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, संबंधित व्यक्ति की फोटो सोसायटी ग्रुप्स और सार्वजनिक नोटिस बोर्ड पर साझा की जाएगी, ताकि अन्य निवासियों को भी सतर्क किया जा सके।
पार्किंग में डॉग अटैक पर भी रोक
निवासियों की शिकायत थी कि बेसमेंट पार्किंग में कुछ कुत्तों द्वारा गाड़ियों के कवर फाड़ने और स्क्रैच करने की घटनाएं सामने आई हैं। इसे देखते हुए पार्किंग एरिया में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और चेतावनी बोर्ड भी स्थापित किए जाएंगे।
जीरो टॉलरेंस नीति का उद्देश्य
सोसायटी प्रबंधन का कहना है कि इन कड़े नियमों का मकसद किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि परिसर को स्वच्छ, सुरक्षित और अनुशासित बनाना है, ताकि सभी निवासियों को बेहतर और स्वस्थ वातावरण मिल सके।
नई नीति के लागू होने के बाद अब देखना होगा कि निवासी इन नियमों का कितना पालन करते हैं और क्या यह पहल अन्य सोसायटियों के लिए भी उदाहरण बनती है।
