Monday, February 23

रांची निकाय चुनाव: स्कूल की बेंच पर सोकर गुजारी रात, भोजन और पानी के लिए भटके मतदान कर्मी

रांची, 23 फरवरी 2026: झारखंड निकाय चुनाव के तहत राजधानी Ranchi में मतदान जारी है। लोकतंत्र के इस महापर्व को संपन्न कराने के लिए पोलिंग पार्टियां निर्धारित केंद्रों पर देर रात ही पहुंच गई थीं। हालांकि प्रशासन के दावों के उलट कई मतदान केंद्रों पर अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आई हैं, जहां कर्मियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा।

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स्कूल की बेंच पर सोने को मजबूर कर्मी

वार्ड संख्या-18 स्थित Rajkiya Hindi Madhya Vidyalaya Thadpakhna में तैनात मतदान कर्मियों ने व्यवस्थाओं की कमी पर सवाल उठाए। कर्मियों के अनुसार, केंद्र पर न तो सोने के लिए गद्दे उपलब्ध कराए गए और न ही चादरों की व्यवस्था थी।

मच्छरों का प्रकोप और साफ पीने के पानी की कमी ने परेशानी को और बढ़ा दिया। एक कर्मी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उन्हें पूरी रात स्कूल की बेंच पर सोकर गुजारनी पड़ी।

भोजन और पानी के लिए भटकना पड़ा

सिर्फ विश्राम की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि भोजन की सुविधा भी कई केंद्रों पर नदारद रही। शहर के कुछ मतदान केंद्रों के आसपास होटल या भोजनालय उपलब्ध नहीं थे, जिससे कर्मियों को रात के भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।

कई कर्मचारियों ने स्थानीय दुकानों से बिस्किट और सूखे खाद्य पदार्थ खरीदकर काम चलाया। पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी असंतोष रहा, जिसके चलते कई कर्मियों को अपने खर्च पर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा।

महिला संचालित बूथों पर भी चुनौतियां

Morabadi स्थित रेडक्रॉस सेंटर में सात महिला संचालित बूथ बनाए गए हैं। यहां पूरी व्यवस्था महिला कर्मियों के जिम्मे है। सुबह छह बजे से ही महिला मतदानकर्मी डिस्पैच सेंटर पहुंच गई थीं।

हालांकि, शुरुआती अव्यवस्थाओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और स्वयं बूथ को व्यवस्थित करने में जुट गईं। कर्मियों के अनुसार, कई स्थानों पर दोपहर दो बजे तक बिना भोजन और पानी के ही ड्यूटी निभानी पड़ी।

48 निकायों में हो रहा मतदान

झारखंड निकाय चुनाव के तहत राज्य के 48 निकायों में मतदान हो रहा है। चुनाव परिणाम 27 फरवरी को घोषित किए जाएंगे।

मतदान कर्मियों की शिकायतों ने चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन अव्यवस्थाओं को किस तरह दूर करता है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जुटे कर्मियों को भविष्य में ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

लोकतंत्र के इस उत्सव में जहां मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं पर्दे के पीछे ड्यूटी निभा रहे कर्मियों की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

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