
मिर्जापुर, 23 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश के Mirzapur स्थित जिला कारागार में तैनात 45 वर्षीय वार्डर आनंद शुक्ला की बीमारी के चलते रविवार शाम मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक की पत्नी का कहना है कि उनके पति ने इलाज के लिए छुट्टी मांगी थी, लेकिन जेल अधीक्षक ने अनुमति नहीं दी, जिसके कारण समय पर बेहतर उपचार नहीं हो सका।
अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम
आनंद शुक्ला मूल रूप से जौनपुर जिले के खेतासराय क्षेत्र के हरन गांव के निवासी थे। वह पिछले छह महीने से मिर्जापुर जिला कारागार में तैनात थे।
पत्नी प्रीति के अनुसार, पिछले तीन दिनों से उनके पति पैरों में झनझनाहट की शिकायत कर रहे थे। रविवार शाम करीब सात बजे उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। पहले जेल के चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार किया, बाद में उन्हें मंडलीय अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पत्नी का आरोप— ‘छुट्टी मिल जाती तो बच सकती थी जान’
मृतक की पत्नी प्रीति का आरोप है कि उनके पति ने स्वास्थ्य खराब होने पर जेल अधीक्षक से अवकाश की मांग की थी, लेकिन छुट्टी नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते उन्हें अवकाश मिल जाता, तो बेहतर इलाज संभव था और शायद उनकी जान बच सकती थी।
घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पत्नी और बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है।
जेल अधीक्षक ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, जेल अधीक्षक RP Chaudhary ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले आनंद शुक्ला को उनके साले की शादी में शामिल होने के लिए एक सप्ताह की छुट्टी दी गई थी।
उन्होंने कहा कि समय-समय पर कर्मचारियों को अवकाश दिया जाता है और बीमार होने पर उपचार की व्यवस्था भी की गई थी। पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को उन्होंने निराधार बताया।
सवालों के घेरे में प्रशासन
इस घटना ने कारागार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कर्मचारी को समय पर पर्याप्त चिकित्सीय सुविधा मिली? क्या स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लिया गया?
इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वार्डर की असमय मौत ने पूरे विभाग को झकझोर दिया है।
