
नई दिल्ली/जम्मू-कश्मीर: पहलगाम के बैसरन घाटी में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद आतंकवादियों ने अपना हमला करने का पैटर्न बदल दिया है। अब वे निचले इलाकों की बजाय ऊंचाई वाले बर्फीले और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को अपना निशाना बना रहे हैं, जहां सेना की पहुंच मुश्किल होती है और टूरिस्ट अधिक जाते हैं।
सीआरपीएफ ने बदला ऑपरेशन पैटर्न
जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने भी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया है। सीआरपीएफ अब पहाड़ों की बर्फीली चोटियों पर टेंपरेरी ऑपरेटिंग बेस (TOB) बना रही है, ताकि आतंकवादियों पर नजर रखी जा सके।
सीआरपीएफ सूत्रों के अनुसार, पिछले साल के बैसरन हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 43 TOB बनाए जा चुके हैं, जिनमें से 17 जम्मू और 26 कश्मीर में स्थित हैं। इन पोस्टों में स्पेशल वेपन के साथ जवान हमेशा मुस्तैद रहते हैं। जरूरत पड़ने पर जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल भी इन पोस्टों में शामिल किए जाते हैं।
आतंकियों की चाल पर अंकुश
पहले आतंकवादी अपने गढ़ मानकर ऊपरी इलाकों में बेखौफ मूवमेंट करते थे। अब इन टेंपरेरी बेसों के कारण उनकी हरकतों पर रोक लग गई है। लगातार मुठभेड़ों के चलते आतंकवादियों को यह एहसास हो गया है कि निचले इलाकों के साथ-साथ ऊपरी इलाकों में भी वे सुरक्षित नहीं हैं।
ठंड और ऊंचाई के लिए विशेष तैयारियाँ
ऊंचाई और जमा देने वाली ठंड को देखते हुए, TOB में तैनात जवानों को स्पेशल ड्रेस, बूट, ट्रिपल लेयर जैकेट और चश्मे दिए गए हैं। फोन कनेक्टिविटी न होने के कारण सेटेलाइट फोन और अन्य तकनीकी गैजेट भी जवानों को प्रदान किए गए हैं, जिससे वे आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दे सकें।
पुराने पैटर्न की कमी
पहले आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगने पर फोर्स को नीचे से ऊपर पहुंचने में समय लगता था, जिससे आतंकवादियों को भागने और छिपने का पर्याप्त मौका मिल जाता था। अब TOB के माध्यम से हर जगह नजर रखने से आतंकवादी अपने मूवमेंट पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं।
