Thursday, February 19

राजीव गांधी ने क्यों बचाए इंदिरा के हत्यारों को? ठक्कर आयोग की रिपोर्ट पर बीजेपी का सवाल

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में गठित ठक्कर आयोग की रिपोर्ट को लेकर अब राजनीतिक हंगामा तेज हो गया है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सवाल उठाया है कि पूर्व पीएम राजीव गांधी ने अपनी मां के हत्यारों को बचाने की कोशिश क्यों की थी।

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निशिकांत दुबे ने उठाए गंभीर सवाल

बीजेपी सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया कि क्या आपको पता है कि इंदिरा गांधी हत्या की साजिश की जांच का रहस्य क्या है। दुबे ने आरोप लगाया कि राजीव गांधी सरकार ने ठक्कर आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने की जिद की। इसी विवाद के चलते 1989 में विपक्ष के 63 सांसदों को लोकसभा से निलंबित किया गया था।

आयोग का उद्देश्य और जांच

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सुरक्षागार्ड बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्या की जांच और सुरक्षा खामियों की पड़ताल के लिए ठक्कर आयोग गठित किया गया।

  • आयोग का नेतृत्व न्यायमूर्ति एम.पी. ठक्कर कर रहे थे।

  • आयोग ने हत्या में सुरक्षा खामियां, मेडिकल स्टाफ की लापरवाही और आंतरिक या विदेशी साजिश की जांच की।

  • रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों के अलावा इंदिरा गांधी के सहयोगी आर.के. धवन की भूमिका संदिग्ध बताई गई थी। हालांकि सरकार ने बाद में इसे खारिज कर दिया।

63 सांसदों के निलंबन का मामला

1989 में बीजेपी सांसदों ने मांग की कि ठक्कर आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। रिपोर्ट पेश करने को लेकर संसद में हंगामा हुआ और लोकसभा ने 63 सांसदों को निलंबित कर दिया

बीजेपी का सवाल साफ है — एक बेटा, अपनी मां के हत्यारों को क्यों बचाने की कोशिश कर रहा था? इस मुद्दे ने एक बार फिर कांग्रेस और राजीव गांधी सरकार की नीति पर राजनीतिक बहस को हवा दी है।

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