
भोपाल: मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था इन वर्षों में अभूतपूर्व गति पकड़ चुकी है। विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 और बजट आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में प्रदेश का बजट ₹2,24,237 करोड़ से बढ़कर अब ₹4,38,317 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि सिर्फ 5 साल में बजट में लगभग ₹1.60 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक राज्य की अर्थव्यवस्था और बजट को दोगुना किया जाए।
बजट का पांच सालों में सफर
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2022-23: ₹2,24,237 करोड़
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2023-24: ₹3,14,025 करोड़
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2024-25: ₹3,65,067 करोड़
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2025-26 (संशोधित अनुमान): ₹4,21,032 करोड़
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2026-27: ₹4,38,317 करोड़
यह तेजी यह दर्शाती है कि मध्य प्रदेश की कमाई और खर्च करने की क्षमता दोनों में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
आम आदमी की क्रय शक्ति में बढ़ोतरी
प्रदेश में व्यक्ति की औसत सालाना आय भी लगातार बढ़ रही है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, साल 2011-12 में यह केवल ₹38,497 थी, जो अब 2025-26 में बढ़कर ₹1,69,050 हो गई है। इसका मतलब है कि पिछले पांच सालों में आम लोगों की खरीदने की शक्ति में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकार ने इस बढ़े हुए बजट का बड़ा हिस्सा लाडली बहना योजना (₹23,800 करोड़), किसान कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर खर्च किया है। राज्य का GSDP 11.14% की दर से बढ़ रहा है, जिससे मध्य प्रदेश देश की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है।
