Wednesday, February 18

कम लागत में घर बनाने के लिए फ्लाई ऐश ईंट क्यों है सबसे बढ़िया

मुंबई, 18 फरवरी 2026: बढ़ती निर्माण लागत के बीच अब घर बनाने वाले फ्लाई ऐश ईंट का विकल्प चुन रहे हैं। सिविल इंजीनियर अर्पित मिश्रा के मुताबिक यह न केवल किफायती है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर साबित होती है।

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फ्लाई ऐश ईंट कैसे बनती है

फ्लाई ऐश ईंट कोयले की राख, रेत और सीमेंट के मिश्रण से हाइड्रोलिक प्रेशर मशीन द्वारा तैयार की जाती है। लाल ईंट के विपरीत, इसमें उपजाऊ मिट्टी का इस्तेमाल नहीं होता और भट्टियों में पकाने की आवश्यकता नहीं होती। इसका आकार बिल्कुल सटीक और एक जैसा होता है, जिससे निर्माण में समय और मसाला दोनों की बचत होती है।

मजबूती और टिकाऊपन

अर्पित मिश्रा के अनुसार, फ्लाई ऐश ईंट की स्ट्रेंथ लाल ईंटों से अधिक होती है। यह कम नमी सोखती है, इसलिए दीवारों में सीलन और सफेद धब्बे नहीं पड़ते। निर्माण और ढुलाई के दौरान टूटने-फूटने का खतरा भी बहुत कम रहता है।

लागत में भारी बचत

  • मसाले की बचत: साइज एक जैसा होने से सीमेंट और लेबर लागत कम होती है।

  • कम मजदूरी: बड़ी साइज की वजह से कम ईंटों में ज्यादा एरिया कवर होता है।

  • सस्ती कीमत: लाल ईंट की तुलना में लगभग 30% कम खर्च आती है।

  • पानी की बचत: इस्तेमाल से पहले भिगोने की जरूरत नहीं होती।

थर्मल और साउंड इंसुलेशन

फ्लाई ऐश ईंट गर्मी में घर को ठंडा रखती है और बहुमंजिला या बड़े स्ट्रक्चर के लिए उपयुक्त होती है। इसका वजन लाल ईंट की तुलना में कम होने से डेड लोड भी घटता है। इसके साथ ही साउंड इंसुलेशन भी बेहतर होता है।

पर्यावरण के लिए लाभकारी

यह ग्रीन प्रोडक्ट है। उपजाऊ मिट्टी का उपयोग नहीं होता और भट्टियों में जलाने की जरूरत नहीं होने से प्रदूषण कम होता है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल वेस्ट का इस्तेमाल इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है।

सावधानियां और नुकसान

  • बॉन्डिंग की समस्या: सतह बहुत स्मूद होने पर कंक्रीट या प्लास्टर के साथ पकड़ कमजोर हो सकती है।

  • क्वालिटी का खतरा: अनुपात सही न होने पर ईंट जल्दी झड़ सकती है।

  • प्लास्टर की लिमिट: बिना लाइम कोटिंग के जिप्सम प्लास्टर मुश्किल है।

  • सर्दी में परेशानी: लाल ईंट की तुलना में धूप सोखने की क्षमता कम होती है।

निष्कर्ष

फ्लाई ऐश ईंट कम लागत, मजबूत और टिकाऊ घर बनाने के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। हालांकि सावधानी बरतकर और सही अनुपात के साथ ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

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