
बागपत (विवेक मिश्रा): अब संविधान को समझना सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़ौत नगर पालिका परिसर में बनाए गए संविधान पार्क में बच्चे खेल-खेल में संविधान के मूल्यों को सीखेंगे, युवा नागरिक अपने कर्तव्यों से जुड़ेंगे और आमजन स्वस्थ जीवन के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा पाएंगे।
यह पार्क “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा का जीवंत उदाहरण पेश करता है, क्योंकि इसे पूरी तरह रिसाइकिल्ड कचरे से बनाया गया है। 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी संविधान की प्रतिकृति, बच्चों और युवाओं के लिए सीखने का अनुभव आनंददायक बनाती है।
हर उम्र के लिए सीखने का मंच
संविधान पार्क केवल हरियाली या टहलने की जगह नहीं है। इसे एक ओपन क्लासरूम और स्ट्रीट लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया गया है। पार्क में न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संविधान के मूल आदर्शों को बोर्डों, संरचनाओं और प्रतीकों के माध्यम से पेश किया गया है, ताकि हर आयु वर्ग का व्यक्ति आसानी से उनसे जुड़ सके।
संविधान और पर्यावरण का संगम
पार्क की सबसे बड़ी विशेषता है यहां स्थापित 600 किलोग्राम वजन वाली संविधान की विराट प्रतिकृति, जो आकार में भव्य और संदेश में प्रभावशाली है। इसके अलावा, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरखा आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता है। पार्क में विकसित वाटर कियोस्क बागपत के प्राचीन नाम ‘व्याघप्रस्थ’ की थीम पर आधारित है, जो स्थानीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव दर्शाता है।
शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक समृद्धि
पार्क में अधिकारों और कर्तव्यों के बोर्ड, बुक प्वाइंट, लाइब्रेरी और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। यहां आने वाला व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से सक्रिय होता है, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी समृद्ध होता है। यही कारण है कि यह पार्क बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
देश के लिए प्रेरक मॉडल
जिलाधिकारी अस्मिता लाल के अनुसार, बागपत का संविधान पार्क बेहतर सेहत के साथ-साथ नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की समझ देता है। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ संस्कार, आधुनिकता के साथ संविधान और सेहत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ा गया है। संविधान पार्क आज न केवल बागपत की पहचान है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।