Thursday, January 29

यूजीसी का विरोध पहली बार नहीं, 15 साल में कई बार विवादों में घिरा आयोग

 

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यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) एक बार फिर अपने नए नियमों को लेकर विवादों में है। बीते दो सप्ताह से देशभर में यूजीसी के नए ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब यूजीसी के फैसलों पर सवाल उठे हों। पिछले 15 वर्षों में यूजीसी से जुड़े कम से कम 10 बड़े विवाद सामने आ चुके हैं, जिनमें कई मामलों में आयोग को अपने फैसले वापस लेने पड़े, तो कई बार सुप्रीम कोर्ट ने उसके नियमों को वैध ठहराया।

 

यूजीसी की स्थापना 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने की थी। नवंबर 1956 में संसद द्वारा पारित यूजीसी अधिनियम के तहत इसे वैधानिक दर्जा मिला। देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में मान्यता, नियमन और छात्रों के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी यूजीसी पर है, लेकिन इसके कई फैसले समय-समय पर विवादों का कारण बने हैं।

 

यूजीसी से जुड़े प्रमुख विवादों की टाइमलाइन

 

2009–10: डीम्ड यूनिवर्सिटीज की मान्यता रद्द

यूजीसी ने टंडन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 44 डीम्ड यूनिवर्सिटीज की मान्यता रद्द करने का फैसला लिया। इसके खिलाफ छात्रों और संस्थानों ने विरोध किया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कुछ विश्वविद्यालयों को राहत मिली, जबकि कुछ की मान्यता रद्द हुई।

 

2013–14: दिल्ली यूनिवर्सिटी में FYUP विवाद

दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUP) लागू करने को लेकर छात्रों और शिक्षकों ने तीव्र विरोध किया। अंततः 2014 में यूजीसी को यह योजना वापस लेनी पड़ी।

 

2015: चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS)

क्रेडिट आधारित शिक्षा प्रणाली लागू करने पर शिक्षकों ने बिना तैयारी के बदलाव का आरोप लगाया। विरोध के बावजूद यह प्रणाली लागू रही, हालांकि यूजीसी को दिशा-निर्देशों में संशोधन करने पड़े।

 

2016–19: कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव

रोहित वेमुला और पायल तडवी आत्महत्या मामलों के बाद कैंपस में भेदभाव को लेकर गंभीर सवाल उठे। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुईं और यूजीसी से सख्त नियमों की मांग की गई।

 

2018: 60 विश्वविद्यालयों को ग्रेडेड ऑटोनॉमी

यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता देने पर निजीकरण को बढ़ावा देने के आरोप लगे। संसद तक मामला पहुंचा, हालांकि स्वायत्तता जारी रही।

 

2020: कोविड-19 के दौरान परीक्षाएं

महामारी के बीच अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के आदेश पर विरोध हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा कराने के विकल्प के साथ यूजीसी के फैसले को सही ठहराया।

 

2022: CUET परीक्षा में अव्यवस्थाएं

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) में तकनीकी खामियों और देरी के कारण यूजीसी को आलोचना झेलनी पड़ी।

 

2023: आरक्षण पदों की डी-रिजर्वेशन गाइडलाइन

SC, ST और OBC पद खाली रहने पर जनरल कैटेगरी से भर्ती के प्रस्ताव का कड़ा विरोध हुआ। अंततः यूजीसी को ड्राफ्ट वापस लेना पड़ा।

 

2024: यूजीसी नेट पेपर लीक

पेपर लीक के चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी। सीबीआई जांच और छात्रों के प्रदर्शन के बाद नई तारीखों पर परीक्षा कराई गई।

 

2025: रिसर्च जर्नल्स की सूची हटाना

यूजीसी द्वारा अप्रूव्ड जर्नल्स की सूची हटाने पर शिक्षकों ने फर्जी जर्नल्स बढ़ने की आशंका जताई। बाद में नई गाइडलाइंस जारी की गईं।

 

2026: इक्विटी रेगुलेशंस पर विवाद

यूजीसी का दावा है कि नया इक्विटी एक्ट जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए है, जबकि जनरल कैटेगरी के संगठनों का आरोप है कि नियम एकतरफा हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में विरोध जारी है और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अदालत का फैसला उच्च शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

 

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