Thursday, January 29

आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वकीलों को एक सप्ताह में लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश

नई दिल्ली।
आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और उससे जुड़े नियमों में संशोधन की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संबंधित वकीलों को एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान कुत्ता प्रेमियों, कुत्तों के हमलों के पीड़ितों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, साथ ही केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखीं।

राज्यों के कदमों पर अदालत की नजर

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों द्वारा आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर भी विचार किया। इसके अलावा, अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी रोकने और सड़कों की उचित बाड़बंदी को लेकर उठाए गए उपायों की जानकारी भी सुनी।

पशु आश्रयों को लेकर सख्त निर्देश

पीठ ने पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) को निर्देश दिया कि वह पशु आश्रयों और पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) सुविधाओं की अनुमति के लिए गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दिए गए आवेदनों पर शीघ्र निर्णय ले। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदनों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए और समयबद्ध तरीके से स्वीकार या अस्वीकार किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में आने वाले फैसले को आवारा कुत्तों की समस्या, सार्वजनिक सुरक्षा और पशु अधिकारों के संतुलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

 

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