
नई दिल्ली।
फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वार्सेन अघाबेकियन शाहीन ने भारत की पश्चिम एशिया नीति की सराहना करते हुए कहा है कि भारत इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच मध्यस्थ की अहम भूमिका निभा सकता है। भारत यात्रा पर आईं फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को रेखांकित किया तथा भारत को एक ऐसा देश बताया जिस पर फिलिस्तीन को पूर्ण विश्वास है।
विदेश मंत्री शाहीन ने कहा कि भारत एक महान राष्ट्र है, जिसने हमेशा फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों और संघर्ष का समर्थन किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून, दो-राज्य समाधान और न्यूयॉर्क घोषणा के आधार पर शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
‘हम भारत का बहुत सम्मान करते हैं’
अपनी पहली भारत यात्रा को लेकर उत्साह जताते हुए शाहीन ने कहा कि भारत आकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है और वे भविष्य में भी भारत आने की इच्छा रखती हैं। उन्होंने भारत को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि फिलिस्तीन भारत का बहुत सम्मान करता है और उसे भरोसा है कि भारत, इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष और कब्जे को समाप्त करने में मददगार साबित हो सकता है।
भारत के विकास सहयोग की सराहना
फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने फिलिस्तीन में भारत की विकास सहायता की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वेस्ट बैंक में भारतीय सहयोग से बने स्कूलों, अस्पतालों, विशेष चिकित्सा केंद्रों और फिलिस्तीनी बच्चों के लिए खेल व मनोरंजन केंद्रों का उन्होंने विशेष उल्लेख किया।
भारत के रुख को बताया स्पष्ट
शाहीन ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में दो-राज्य समाधान, फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार और मानवाधिकार परिषद में संबंधित प्रस्तावों का लगातार समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत के इज़रायल और फिलिस्तीन—दोनों के साथ रणनीतिक संबंध हैं, जो उसे क्षेत्र में संतुलित भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं।
ऐतिहासिक संबंधों की दिलाई याद
विदेश मंत्री ने बताया कि फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने वर्ष 2017 में भारत का दौरा किया था, जिसके दौरान कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए थे।
उन्होंने भारत-फिलिस्तीन संबंधों की ऐतिहासिक जड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते 1930 के दशक से जुड़े हैं। वर्ष 1947 में फिलिस्तीन के विभाजन का भारत द्वारा विरोध और महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से कब्जे के खिलाफ फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा है।