
बांदा।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आए एक जघन्य हत्याकांड में अदालत ने साढ़े तीन साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। अपनी ही नाबालिग बेटी की गला दबाकर हत्या करने वाले कलयुगी पिता को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह फैसला स्पेशल जज (पॉक्सो एक्ट), बांदा की अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया। अदालत ने आरोपी देशराज को दोषी करार देते हुए कहा कि यह अपराध न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि समाज और मानवता को भी शर्मसार करने वाला है।
अप्रैल 2022 में लापता हुई थी किशोरी
मामला थाना नरैनी क्षेत्र के ग्राम पौसरा का है। अप्रैल 2022 में गांव की एक किशोरी अचानक लापता हो गई थी। 22 अप्रैल 2022 को एक सतर्क पड़ोसी ने पुलिस को सूचना दी कि किशोरी बीते दो दिनों से घर से गायब है। सूचना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। पुलिस को पता चला कि किशोरी की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसके अपने पिता ने ही की थी।
घर के पीछे जमीन में दफनाया गया था शव
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घर के पीछे खुदाई कराई, जहां से किशोरी का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला दबाना बताया गया।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि विरोध करने पर उसने बेटी की हत्या कर दी और सबूत मिटाने के इरादे से शव को दफना दिया।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
वादी निरीक्षक राकेश कुमार तिवारी की तहरीर पर थाना नरैनी में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत मिटाना) समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले की विवेचना निरीक्षक मनोज कुमार शुक्ला ने की और 6 दिसंबर 2022 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
अभियोजन की सशक्त पैरवी से मिली सजा
अभियोग पक्ष की ओर से अधिवक्ता वीरेंद्र द्विवेदी ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। अभियोजन और पुलिस की मजबूत पैरवी के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज के लिए भी कड़ा संदेश है कि अपराध चाहे घर की चारदीवारी के भीतर ही क्यों न किया गया हो, कानून से कोई ऊपर नहीं है।