
सुप्रीम कोर्ट ने धर्म बदलकर अल्पसंख्यक कोटे का लाभ लेने की कोशिश करने वाले हरियाणा के डॉक्टर भाई-बहन की याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए यह जांच शुरू की है कि क्या उच्च जाति के व्यक्ति अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त करने के लिए धर्म परिवर्तन कर सकते हैं।
भाई-बहन ने NEET-PG परीक्षा उत्तीर्ण की थी और उत्तर प्रदेश के एक विशेष मेडिकल कॉलेज में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे से प्रवेश लेना चाहते थे। कोर्ट ने पाया कि ये दोनों मूल रूप से सामान्य वर्ग के जाट समुदाय से हैं और कथित रूप से बौद्ध धर्म अपनाकर हरियाणा के उप-विभागीय अधिकारी (SDO) से अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र प्राप्त किया था।
CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा, “तो आप अल्पसंख्यक कैसे हो जाते हैं?” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कदम वास्तविक अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को छीनना माना जाएगा। उन्होंने कहा कि उच्च जातियों के धनी और संपन्न लोग इस तरीके का लाभ लेकर समाज में धोखाधड़ी कर सकते हैं।
पीठ ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव से एसडीओ द्वारा जारी प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया की जांच करने को कहा। जबकि याचिका खारिज कर दी गई है, कोर्ट ने व्यापक मुद्दे पर अंतिम फैसला मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद करने के लिए स्थगित किया।
CJI ने याचिकाकर्ताओं को यह भी चेताया कि धर्म बदलने की यह प्रक्रिया धोखाधड़ी का नया तरीका हो सकती है और ऐसे कदम उठाने की बजाय उन्हें अपनी योग्यता और मेहनत पर गर्व करना चाहिए।