
ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले हिंसा की आशंकाएं सच साबित होती दिख रही हैं। बुधवार को शेरपुर जिले में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प में जमात-ए-इस्लामी के एक स्थानीय नेता की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, शेरपुर के झेनाइगाती उपजिला में शेरपुर-3 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए चुनावी घोषणापत्र पढ़ने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान मंच और बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते भीषण झड़प में बदल गया।
बैठने के विवाद ने लिया हिंसक रूप
पुलिस के मुताबिक, झड़प में जमात-ए-इस्लामी के स्थानीय नेता रेजाउल करीम गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले झेनाइगाती उपजिला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से शेरपुर जिला अस्पताल और बाद में मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। हालांकि इलाज के दौरान रात करीब 9.35 बजे उनकी मौत हो गई। रेजाउल करीम, जमात-ए-इस्लामी की श्रीबर्दी उपजिला यूनिट के जनरल सेक्रेटरी थे।
100 से ज्यादा कुर्सियां तोड़ीं, मोटरसाइकिलें फूंकी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झड़प के दौरान कार्यक्रम स्थल पर भारी तोड़फोड़ हुई। 100 से अधिक कुर्सियां तोड़ दी गईं और करीब छह मोटरसाइकिलों में आग लगा दी गई। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
जमात ने निकाली विरोध रैली
घटना के बाद जमात-ए-इस्लामी की जिला इकाई ने शेरपुर में विरोध रैली निकाली और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। शेरपुर-3 सीट से जमात उम्मीदवार मोहम्मद नूरुज्जमान बादल ने कहा कि झड़प में पार्टी के कई नेता-कार्यकर्ता घायल हुए हैं और प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पुलिस कैंप के इंचार्ज मोहम्मद नजरुल इस्लाम ने बताया कि रेजाउल करीम के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।
चुनाव से पहले बढ़ता तनाव
इस घटना ने बांग्लादेश में चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में चुनावी हिंसा और बढ़ सकती है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का संकेत दिया है।