
नई दिल्ली। भारत में जानलेवा निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि होते ही पूरे एशिया में सतर्कता बढ़ा दी गई है। पाकिस्तान, सिंगापुर, हांगकांग, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों ने संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए अपने हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच सख्त कर दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही निपाह वायरस को प्राथमिकता वाले खतरनाक पैथोजन की श्रेणी में रख चुका है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है।
पाकिस्तान में हाई अलर्ट, एयरपोर्ट पर कड़ी निगरानी
पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन बॉर्डर हेल्थ सर्विसेज ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी कर भारत से सटे इलाकों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को लेकर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। एडवाइजरी में पश्चिम बंगाल में सामने आए संदिग्ध मामलों का हवाला देते हुए चेतावनी दी गई है कि निपाह वायरस की जूनोटिक प्रकृति (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) और इंसान से इंसान में संक्रमण की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
सरकार ने सभी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर थर्मल स्क्रीनिंग, क्लिनिकल असेसमेंट अनिवार्य कर दिया है और स्टाफ को बुखार, सांस की बीमारी व अन्य लक्षणों पर कड़ी नजर रखने के आदेश दिए हैं। एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की लापरवाही को ‘गंभीर चूक’ माना जाएगा।
सिंगापुर, हांगकांग, थाईलैंड और मलेशिया में भी सख्ती
रिपोर्टों के मुताबिक, सिंगापुर, हांगकांग, थाईलैंड और मलेशिया ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और तापमान जांच शुरू या और कड़ी कर दी है। सिंगापुर की कम्युनिकेबल डिजीज एजेंसी ने घोषणा की है कि भारत के प्रभावित इलाकों से आने वाली उड़ानों पर यात्रियों की विशेष स्वास्थ्य जांच की जाएगी।
भारत में स्थिति नियंत्रण में: स्वास्थ्य मंत्रालय
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दोनों संक्रमित मरीज स्वास्थ्यकर्मी हैं और उनका इलाज जारी है। अधिकारियों ने दोनों मामलों से जुड़े 196 कॉन्टैक्ट्स की पहचान की है, जिनकी जांच में कोई भी संक्रमित नहीं पाया गया। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि निपाह वायरस को लेकर अफवाहें और गलत आंकड़े फैलाए जा रहे हैं, जबकि बढ़ी हुई निगरानी, लैब टेस्ट और फील्ड जांच से स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया है।
क्या है निपाह वायरस और क्यों है इतना खतरनाक
निपाह वायरस पहली बार 1998-99 में मलेशिया में सामने आया था। इसका नाम उस गांव कम्पुंग सुंगई निपाह के नाम पर पड़ा, जहां शुरुआती मरीज मिले थे। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों और सूअरों से इंसानों में फैलता है। संक्रमण के बाद मरीज को तेज बुखार, शरीर में सूजन और गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन (एन्सेफेलाइटिस) हो सकती है।
फिलहाल इस वायरस के खिलाफ कोई स्वीकृत वैक्सीन या पुख्ता इलाज मौजूद नहीं है, हालांकि वैक्सीन पर शोध जारी है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव और समय पर पहचान ही सबसे बड़ा हथियार है।
एशिया में बढ़ी चौकसी
भारत में मिले मामलों के बाद एशियाई देशों में साफ संदेश है— कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है। सीमा पार आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर नजर बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय रहते उठाए गए ये कदम निपाह जैसे खतरनाक वायरस के फैलाव को रोकने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।