
रियाद। मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीति के बीच भारत और सऊदी अरब के रिश्तों को लेकर एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ भारत द्वारा इसी महीने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद अब भारत और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच राजधानी रियाद में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक हुई है। इस बैठक को क्षेत्रीय संतुलन और भारत–सऊदी संबंधों में विश्वास बहाली के तौर पर देखा जा रहा है।
28 जनवरी को हुई इस बैठक में दोनों देशों ने चल रहे सुरक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा की और वैश्विक तथा क्षेत्रीय स्तर पर आतंकवाद से पैदा होने वाले खतरों पर गहन चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब सऊदी अरब पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ ‘NATO जैसे’ सुरक्षा समझौते को लेकर चर्चा में रहा है और भारत–UAE रक्षा समझौते ने रियाद की चिंता बढ़ाई मानी जा रही है।
तीसरे सुरक्षा वर्किंग ग्रुप की बैठक
रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारत–सऊदी अरब तीसरे सुरक्षा वर्किंग ग्रुप की बैठक थी। इसकी सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (काउंटर टेररिज्म) विनोद बहाडे और सऊदी गृह मंत्रालय में कानूनी मामलों व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महानिदेशक अहमद अल-ईसा ने की।
भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, बैठक में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। इसमें उग्रवाद और कट्टरपंथ से निपटना, आतंकवाद की फंडिंग पर रोक, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को रोकना, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
आतंकी हमलों की संयुक्त निंदा
दोनों देशों के अधिकारियों ने भारत में हुए बड़े आतंकी हमलों की कड़ी निंदा भी की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सऊदी अरब और भारत ने पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले और 10 नवंबर को लाल किले पर हुए आतंकी हमले की संयुक्त रूप से निंदा की। साथ ही द्विपक्षीय कानूनी, न्यायिक और कानून प्रवर्तन सहयोग को बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
UAE डील के बाद बढ़ी हलचल
इस बैठक को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह भारत और UAE के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर होने के कुछ ही दिनों बाद हुई है। इसी महीने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जाएद ने अचानक कुछ घंटों के लिए भारत का दौरा किया था, जिसके दौरान यह अहम समझौता हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि यमन युद्ध के बाद सऊदी अरब और UAE के बीच रिश्तों में आई तल्खी और पाकिस्तान के साथ सऊदी सुरक्षा समझौते ने क्षेत्रीय समीकरणों को जटिल बना दिया है। ऐसे में सऊदी अरब, खासकर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS), दक्षिण एशिया में अपने अहम साझेदार भारत के साथ किसी भी तरह के अविश्वास को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत का संतुलित रुख
हालांकि, भारतीय अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम को संतुलित नजरिए से देख रहे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 19 जनवरी को भारत–UAE रक्षा साझेदारी पर कहा था कि यह समझौता किसी क्षेत्रीय संघर्ष में भारत को घसीटने के लिए नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद रक्षा सहयोग का स्वाभाविक विस्तार है।
कुल मिलाकर, तेजी से बदलते मध्य पूर्वी परिदृश्य में भारत, सऊदी अरब और UAE—तीनों अपने-अपने हितों के अनुसार कूटनीतिक शतरंज खेल रहे हैं। रियाद में हुई यह बैठक साफ संकेत देती है कि भारत–सऊदी संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों पक्ष फिलहाल कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते।