
ढाका। बांग्लादेश से भारतीय राजनयिकों और दूतावास कर्मचारियों के परिवारों की वापसी को लेकर उठे सवालों पर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा है कि देश में विदेशी राजनयिकों या उनके परिवारों के लिए किसी तरह का सुरक्षा खतरा नहीं है और नई दिल्ली के इस कदम के पीछे उन्हें कोई ठोस वजह नजर नहीं आती।
विदेश मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तौहीद हुसैन ने कहा कि भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने के फैसले को लेकर ढाका को कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है, न ही किसी विशेष सुरक्षा चिंता का उल्लेख किया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि बांग्लादेश में ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिससे यह लगे कि विदेशी अधिकारी या उनके परिजन असुरक्षित हैं।
‘अब तक कोई घटना नहीं हुई’
प्रथम आलो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए विदेश सलाहकार ने कहा,
“सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है। अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है, जिससे खतरे का संकेत मिले। अगर कोई देश अपने राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाना चाहता है, तो यह उसका निर्णय है—हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।”
भारत का एहतियाती कदम
गौरतलब है कि भारत ने बांग्लादेश में संभावित सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए हाल ही में ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के साथ-साथ खुलना, चटगांव, राजशाही और सिलहट में तैनात अधिकारियों के परिवारों को एहतियातन भारत लौटने की सलाह दी थी। सूत्रों के अनुसार, यह सलाह केवल परिवार के सदस्यों के लिए थी और इसका राजनयिक कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश में भारतीय मिशन और सभी दूतावास खुले रहेंगे और अपना नियमित कार्य जारी रखेंगे। यह कदम आगामी आम चुनावों से पहले एहतियाती उपाय के तौर पर उठाया गया बताया गया है।
ढाका को नहीं मिली कोई शिकायत
जब तौहीद हुसैन से पूछा गया कि क्या ढाका स्थित भारतीय दूतावास ने पहले कभी सुरक्षा को लेकर कोई चिंता जताई थी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी शिकायत या सूचना की जानकारी नहीं है।
इस बयान के बाद साफ है कि भारत और बांग्लादेश इस मुद्दे पर अलग-अलग आकलन रख रहे हैं। जहां भारत ने इसे एहतियाती कदम बताया है, वहीं बांग्लादेश का कहना है कि देश में हालात सामान्य हैं और विदेशी राजनयिकों के परिवारों के लिए किसी तरह का खतरा नहीं है।